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Q: स्तनधारी में सामान्य श्वसन के दौरान डायफ्राम होता है
  • A. धनुषाकार
  • B. चपटा
  • C. नीचे धँसा हुआ
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option D - स्तनधारियों में डायाफ्राम , फेफड़ो के नीचे स्थित श्वसन की एक प्रमुख मांसपेशी है। श्वसन क्रिया में साँस लेना और साँस छोड़ना शामिल है। साँस लेने के दौरान गुम्बद के आकार का डायाफ्राम चपटा (संकुचित) हो जाता है और बाहरी इंटर कोस्टल मांसपेशियाँ सिकुड़ जाती है, जो पसलियों के पिंजरे को ऊपर की ओर खींचती है, जिससे वक्षीय आयतन में वृद्धि होती है और फुफ्फुसीय दबाव कम हो जाता है और बाहर से हवा फेफड़ो में चली जाती है। वहीं साँस छोड़ने की प्रक्रिया के दौरान अंतर कोस्टल माँस-पेशियाँ पसलियों के पिंजरे को अंदर और नीचे की ओर धकेलती हुई शिथिल हो जाती है, जिससे वक्ष का आयतन कम हो जाता है तथा फुफ्फुसीय दबाव बढ़ जाता है और हवा फेफड़ो से बाहर निकलने को मजबूर हो जाती है। अत: स्पष्ट है कि श्वसन क्रिया के दौरान डायाफ्राम एक से अधिक आकार का होता है।
D. स्तनधारियों में डायाफ्राम , फेफड़ो के नीचे स्थित श्वसन की एक प्रमुख मांसपेशी है। श्वसन क्रिया में साँस लेना और साँस छोड़ना शामिल है। साँस लेने के दौरान गुम्बद के आकार का डायाफ्राम चपटा (संकुचित) हो जाता है और बाहरी इंटर कोस्टल मांसपेशियाँ सिकुड़ जाती है, जो पसलियों के पिंजरे को ऊपर की ओर खींचती है, जिससे वक्षीय आयतन में वृद्धि होती है और फुफ्फुसीय दबाव कम हो जाता है और बाहर से हवा फेफड़ो में चली जाती है। वहीं साँस छोड़ने की प्रक्रिया के दौरान अंतर कोस्टल माँस-पेशियाँ पसलियों के पिंजरे को अंदर और नीचे की ओर धकेलती हुई शिथिल हो जाती है, जिससे वक्ष का आयतन कम हो जाता है तथा फुफ्फुसीय दबाव बढ़ जाता है और हवा फेफड़ो से बाहर निकलने को मजबूर हो जाती है। अत: स्पष्ट है कि श्वसन क्रिया के दौरान डायाफ्राम एक से अधिक आकार का होता है।
Correct Answer: Option E -

Explanations:

स्तनधारियों में डायाफ्राम , फेफड़ो के नीचे स्थित श्वसन की एक प्रमुख मांसपेशी है। श्वसन क्रिया में साँस लेना और साँस छोड़ना शामिल है। साँस लेने के दौरान गुम्बद के आकार का डायाफ्राम चपटा (संकुचित) हो जाता है और बाहरी इंटर कोस्टल मांसपेशियाँ सिकुड़ जाती है, जो पसलियों के पिंजरे को ऊपर की ओर खींचती है, जिससे वक्षीय आयतन में वृद्धि होती है और फुफ्फुसीय दबाव कम हो जाता है और बाहर से हवा फेफड़ो में चली जाती है। वहीं साँस छोड़ने की प्रक्रिया के दौरान अंतर कोस्टल माँस-पेशियाँ पसलियों के पिंजरे को अंदर और नीचे की ओर धकेलती हुई शिथिल हो जाती है, जिससे वक्ष का आयतन कम हो जाता है तथा फुफ्फुसीय दबाव बढ़ जाता है और हवा फेफड़ो से बाहर निकलने को मजबूर हो जाती है। अत: स्पष्ट है कि श्वसन क्रिया के दौरान डायाफ्राम एक से अधिक आकार का होता है।