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Q: ‘सूरदास का प्रेमपक्ष लोक से न्यारा है’ यह कथन किस विद्वान का है?
  • A. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
  • B. आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
  • C. डॉ. रामकुमार वर्मा
  • D. डॉ. बच्चन सिंह
Correct Answer: Option A - ‘सूरदास का प्रेमपक्ष लोक से न्यारा है’ कथन आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी ने ‘भ्रमरगीत सार’ की भूमिका में लिखा है। • सूरदास ने प्रेम के लगभग सभी पक्षों संयोग, वियोग, वात्सल्य को अपनी रचनाओं से सर्वोत्कृष्टता प्रदान की है। ‘भ्रमरगीत’ श्रीमद्भगवत के दशम स्कन्ध के 47वें अध्याय में वर्णित केवल 10 श्लोकों से लिया गया है। ‘सूर सागर’ के कुल 700 पदों में भ्रमरगीतों को प्रस्तुत किया गया है। भ्रमरगीत को प्राय: उपालम्भ काव्य’ कहा गया है। आचार्य शुक्ल ने ध्वनि काव्य’ कहा है। सूरदास के भ्रमरगीत की यह परम्परा आगे भी चलती रही; जैसे - (1) नन्द दास - भंवरगीत (2) सत्यनारायण कविरत्न - भ्रमरदूत’ (3) जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’ - ‘उद्धव शतक’
A. ‘सूरदास का प्रेमपक्ष लोक से न्यारा है’ कथन आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी ने ‘भ्रमरगीत सार’ की भूमिका में लिखा है। • सूरदास ने प्रेम के लगभग सभी पक्षों संयोग, वियोग, वात्सल्य को अपनी रचनाओं से सर्वोत्कृष्टता प्रदान की है। ‘भ्रमरगीत’ श्रीमद्भगवत के दशम स्कन्ध के 47वें अध्याय में वर्णित केवल 10 श्लोकों से लिया गया है। ‘सूर सागर’ के कुल 700 पदों में भ्रमरगीतों को प्रस्तुत किया गया है। भ्रमरगीत को प्राय: उपालम्भ काव्य’ कहा गया है। आचार्य शुक्ल ने ध्वनि काव्य’ कहा है। सूरदास के भ्रमरगीत की यह परम्परा आगे भी चलती रही; जैसे - (1) नन्द दास - भंवरगीत (2) सत्यनारायण कविरत्न - भ्रमरदूत’ (3) जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’ - ‘उद्धव शतक’

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‘सूरदास का प्रेमपक्ष लोक से न्यारा है’ कथन आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी ने ‘भ्रमरगीत सार’ की भूमिका में लिखा है। • सूरदास ने प्रेम के लगभग सभी पक्षों संयोग, वियोग, वात्सल्य को अपनी रचनाओं से सर्वोत्कृष्टता प्रदान की है। ‘भ्रमरगीत’ श्रीमद्भगवत के दशम स्कन्ध के 47वें अध्याय में वर्णित केवल 10 श्लोकों से लिया गया है। ‘सूर सागर’ के कुल 700 पदों में भ्रमरगीतों को प्रस्तुत किया गया है। भ्रमरगीत को प्राय: उपालम्भ काव्य’ कहा गया है। आचार्य शुक्ल ने ध्वनि काव्य’ कहा है। सूरदास के भ्रमरगीत की यह परम्परा आगे भी चलती रही; जैसे - (1) नन्द दास - भंवरगीत (2) सत्यनारायण कविरत्न - भ्रमरदूत’ (3) जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’ - ‘उद्धव शतक’