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Q: सुप्तिड़न्तं भवित-
  • A. वर्णसंज्ञम् ।
  • B. पदसंज्ञम्।
  • C. संयोगसंज्ञम् ।
  • D. संहितासंज्ञम् ।
Correct Answer: Option B - ‘सुप्तिड़न्तं’ पदम् । सुबन्तं तिड़न्तं च पदसंज्ञं स्यात् । अर्थात् जिन शब्दों में सु, औ, जस् से लेकर सुप् तक के प्रत्यय का योग है उसे ‘सुबन्त’ तथा ‘तिप्’ से लेकर ‘महिड़्’ तक के प्रत्यय का जिससे योग हो उसे तिड़न्त कहते जैसे- सुबन्त : राम: रामौ, रामा: ... । तिड़न्त : पठति, पठत: पठन्ति ... ।
B. ‘सुप्तिड़न्तं’ पदम् । सुबन्तं तिड़न्तं च पदसंज्ञं स्यात् । अर्थात् जिन शब्दों में सु, औ, जस् से लेकर सुप् तक के प्रत्यय का योग है उसे ‘सुबन्त’ तथा ‘तिप्’ से लेकर ‘महिड़्’ तक के प्रत्यय का जिससे योग हो उसे तिड़न्त कहते जैसे- सुबन्त : राम: रामौ, रामा: ... । तिड़न्त : पठति, पठत: पठन्ति ... ।

Explanations:

‘सुप्तिड़न्तं’ पदम् । सुबन्तं तिड़न्तं च पदसंज्ञं स्यात् । अर्थात् जिन शब्दों में सु, औ, जस् से लेकर सुप् तक के प्रत्यय का योग है उसे ‘सुबन्त’ तथा ‘तिप्’ से लेकर ‘महिड़्’ तक के प्रत्यय का जिससे योग हो उसे तिड़न्त कहते जैसे- सुबन्त : राम: रामौ, रामा: ... । तिड़न्त : पठति, पठत: पठन्ति ... ।