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Q: Sanchi Stupa inscription are written in this Script साँची स्तूप के शिलालेख इस लिपि में है
  • A. Brahmi/ब्राह्मी
  • B. Prakrit/प्राकृत
  • C. Bhojtal/भोजताल
  • D. Holkar/होल्कर
Correct Answer: Option A - साँची स्तूप के शिलालेख ब्राह्मी लिपि में हैं। सांची स्तूप मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित है। यह बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल है, जिसका निर्माण ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक ने कराया था। अशोक के द्वारा जो शिलालेख बनवाए गए हैं उनमें केवल दो शिलालेख शहबाजगढ़ी और मानसेहरा के शिलालेख खरोष्ठी लिपि में है और उसके शेष सभी लेख ब्राह्मी लिपि में है। इन लेखों की लिपि के लिए सदैव ‘धम्मलिपि’, ‘धम्मदिपि’ या धम्मलिपि शब्दों का प्रयोग किया गया है। अशोक के समस्त धम्मलेखों को मुख्यत: दो भागों में बांटा गया है। (1) शिलास्तम्भ लेख (2) शिलाफलक लेख। साँची स्तूप की खोज 1818 ई. में जनरल टेलर ने की थी तथा यूनेस्को द्वारा वर्ष 1989 में साँची स्तूप को विश्व धरोहर घोषित किया गया था।
A. साँची स्तूप के शिलालेख ब्राह्मी लिपि में हैं। सांची स्तूप मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित है। यह बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल है, जिसका निर्माण ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक ने कराया था। अशोक के द्वारा जो शिलालेख बनवाए गए हैं उनमें केवल दो शिलालेख शहबाजगढ़ी और मानसेहरा के शिलालेख खरोष्ठी लिपि में है और उसके शेष सभी लेख ब्राह्मी लिपि में है। इन लेखों की लिपि के लिए सदैव ‘धम्मलिपि’, ‘धम्मदिपि’ या धम्मलिपि शब्दों का प्रयोग किया गया है। अशोक के समस्त धम्मलेखों को मुख्यत: दो भागों में बांटा गया है। (1) शिलास्तम्भ लेख (2) शिलाफलक लेख। साँची स्तूप की खोज 1818 ई. में जनरल टेलर ने की थी तथा यूनेस्को द्वारा वर्ष 1989 में साँची स्तूप को विश्व धरोहर घोषित किया गया था।

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साँची स्तूप के शिलालेख ब्राह्मी लिपि में हैं। सांची स्तूप मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित है। यह बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल है, जिसका निर्माण ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक ने कराया था। अशोक के द्वारा जो शिलालेख बनवाए गए हैं उनमें केवल दो शिलालेख शहबाजगढ़ी और मानसेहरा के शिलालेख खरोष्ठी लिपि में है और उसके शेष सभी लेख ब्राह्मी लिपि में है। इन लेखों की लिपि के लिए सदैव ‘धम्मलिपि’, ‘धम्मदिपि’ या धम्मलिपि शब्दों का प्रयोग किया गया है। अशोक के समस्त धम्मलेखों को मुख्यत: दो भागों में बांटा गया है। (1) शिलास्तम्भ लेख (2) शिलाफलक लेख। साँची स्तूप की खोज 1818 ई. में जनरल टेलर ने की थी तथा यूनेस्को द्वारा वर्ष 1989 में साँची स्तूप को विश्व धरोहर घोषित किया गया था।