Correct Answer:
Option D - सांख्यकारिकानुसारेण पुरुषबहुत्वमनुमीयते अयुगपत्प्रवृत्ते:। अर्थात् सांख्यकारिका के अनुसार पुरुष का बहुत्व अयुगपत्प्रवृत्ति (प्रत्येक पुरुष की एक साथ अप्रवृत्ति) से अनुमान किया जाता है क्योंकि प्राणियों के जन्म मरण और बुध्द्यादि तेरह कारणों की (प्रत्येक शरीर में भिन्न-भिन्न व्यवहार रूप) व्यवस्था होने से, सभी प्राणियों की एक साथ प्रवृत्ति न होने से अर्थात् अलग-अलग प्रवृत्ति होने से तथा सभी प्राणियों में तीनों (सत्व, रज, तम) गुणों की असमानरूप से स्थिति होने से पुरुष का अनेकत्व (प्रत्येक शरीर भिन्नत्व) सिद्ध होता है। अत: विकल्प (d) सही है, शेष अन्य संघातपरार्थत्वात् (प्रकृति आदि का समूह) भोक्तुं भावात् (जड़ समूहों का भोक्ता) और कैवल्यार्थ प्रवृत्ते: ये तीनों पुरुष (आत्मतत्व) की सत्ता को प्रमाणित करते हैं।
D. सांख्यकारिकानुसारेण पुरुषबहुत्वमनुमीयते अयुगपत्प्रवृत्ते:। अर्थात् सांख्यकारिका के अनुसार पुरुष का बहुत्व अयुगपत्प्रवृत्ति (प्रत्येक पुरुष की एक साथ अप्रवृत्ति) से अनुमान किया जाता है क्योंकि प्राणियों के जन्म मरण और बुध्द्यादि तेरह कारणों की (प्रत्येक शरीर में भिन्न-भिन्न व्यवहार रूप) व्यवस्था होने से, सभी प्राणियों की एक साथ प्रवृत्ति न होने से अर्थात् अलग-अलग प्रवृत्ति होने से तथा सभी प्राणियों में तीनों (सत्व, रज, तम) गुणों की असमानरूप से स्थिति होने से पुरुष का अनेकत्व (प्रत्येक शरीर भिन्नत्व) सिद्ध होता है। अत: विकल्प (d) सही है, शेष अन्य संघातपरार्थत्वात् (प्रकृति आदि का समूह) भोक्तुं भावात् (जड़ समूहों का भोक्ता) और कैवल्यार्थ प्रवृत्ते: ये तीनों पुरुष (आत्मतत्व) की सत्ता को प्रमाणित करते हैं।