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Q: निर्देश: अधोलिखितान् श्लोकान् पठित्वा तदाधारितप्रश्नानां (प्रश्नसंख्या 147-152) विकल्पात्मकोत्तरेभ्य: उचिततमम् उत्तरं चिनुत। शान्तितुल्यं तपो नास्ति न सन्तोषात्परं सुखम्। न तृष्णाया: परो व्याधिर्न च धर्मो दयापर: ।।1।। दृष्टिपूतं न्यसेत्पादं वस्त्रपूतं जलं पिबेत्। शास्त्रपूतं वदेद् वाक्यं मन:पूतं समाचरेत् ।। 2।। तावद् भयाद्धि भेतव्यं यावद् भयमनागतम्। आगतं तु भयं दृष्ट्रवा नर: कुर्याद् यथोचितम् ।।3।। माता शत्रु: पिता वैरी येन बालो न पाठित:। न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा ।।4।। रूपयौवनसम्पन्ना विशालकुलसम्भवा:। विद्याहीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किशुका: ।।5।।
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  • A. भाववाच्यस्य
  • B. कर्मवाच्यस्य
  • C. भावकर्मवाच्यस्य
  • D. कर्तृवाच्यस्य
Correct Answer: Option B - `येन बालो न पाठित:' वाक्यम् इदम् `कर्मवाच्यस्य' अर्थात् येन बालो न पाठित: (जो अपने बच्चों को नहीं पढ़ता है) यह वाक्य कर्मवाच्य का है। कर्मवाच्य का कर्ता तृतीया विभक्ति में तथा कर्म प्रथमाविभक्ति में होता है कर्म के अनुसार ही क्रिया का प्रयोग किया जाता है।
B. `येन बालो न पाठित:' वाक्यम् इदम् `कर्मवाच्यस्य' अर्थात् येन बालो न पाठित: (जो अपने बच्चों को नहीं पढ़ता है) यह वाक्य कर्मवाच्य का है। कर्मवाच्य का कर्ता तृतीया विभक्ति में तथा कर्म प्रथमाविभक्ति में होता है कर्म के अनुसार ही क्रिया का प्रयोग किया जाता है।

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`येन बालो न पाठित:' वाक्यम् इदम् `कर्मवाच्यस्य' अर्थात् येन बालो न पाठित: (जो अपने बच्चों को नहीं पढ़ता है) यह वाक्य कर्मवाच्य का है। कर्मवाच्य का कर्ता तृतीया विभक्ति में तथा कर्म प्रथमाविभक्ति में होता है कर्म के अनुसार ही क्रिया का प्रयोग किया जाता है।