Correct Answer:
Option B - ‘‘सीखना, आवश्यकता की पूर्ति की प्रक्रिया के द्वारा होता है।’’ यह हल का कथन है जो प्रबलन सिद्धान्त या पुनर्बलन सिद्धांत (Theory of Reinforcement) से सम्बन्धित है। इस सिद्धान्त में हल ने बताया है कि आवश्यकता (Need) अधिगम का आधार है अर्थात आवश्यकता ही चालक (Drive) है। आवश्यकता पूरी होते ही चालक कम हो जाता है जिससे अधिगम की दर कम होने लगती है।
सीखने के सूझ के सिद्धान्त - इस सिद्धान्त के प्रवर्तक कोहलर है। इसमें यह विचार किया जाता है कि सीखने की प्रतिक्रिया में सूझ की आवश्यकता पड़ती है। सूझ की आवश्यकता विशेष रूप से उस समय पड़ती है जब समस्या के पूर्ण स्वरूप को समझने में बाधा उत्पन्न होती है।
सम्बद्ध प्रतिक्रिया सिद्धान्त - इस सिद्धान्त के प्रवर्तक पावलव है। इस नियम के अनुसार शिक्षक को यह प्रयास करना चाहिए कि सीखने वाले सम्बन्धों को प्रत्यक्ष कर सके। जैसे - कार्य - कारण सम्बन्ध, ज्ञात से अज्ञात सम्बन्ध, नये से पुराने का सम्बन्ध, विशिष्ट से सामान्य का सम्बन्ध इत्यादि।
प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत - इस सिद्धान्त के प्रवर्तक थार्नडाइक है। इसमें साधन तथा साध्य के सम्बन्ध स्पष्ट न होकर अत्यन्त प्रच्छन्न एवं नहीं के बराबर होते हैं। इसमें सीखने की प्रक्रिया धीरे - धीरे तथा क्रमश: होती है। यह एक सुधार की विधि है। जो प्रयास सफल होंगे उनकी आवृत्ति करनी होगी जो असफल होंगे उन्हें या तो छोड़ देना होगा अथवा उनमें सुधार करना होगा।
B. ‘‘सीखना, आवश्यकता की पूर्ति की प्रक्रिया के द्वारा होता है।’’ यह हल का कथन है जो प्रबलन सिद्धान्त या पुनर्बलन सिद्धांत (Theory of Reinforcement) से सम्बन्धित है। इस सिद्धान्त में हल ने बताया है कि आवश्यकता (Need) अधिगम का आधार है अर्थात आवश्यकता ही चालक (Drive) है। आवश्यकता पूरी होते ही चालक कम हो जाता है जिससे अधिगम की दर कम होने लगती है।
सीखने के सूझ के सिद्धान्त - इस सिद्धान्त के प्रवर्तक कोहलर है। इसमें यह विचार किया जाता है कि सीखने की प्रतिक्रिया में सूझ की आवश्यकता पड़ती है। सूझ की आवश्यकता विशेष रूप से उस समय पड़ती है जब समस्या के पूर्ण स्वरूप को समझने में बाधा उत्पन्न होती है।
सम्बद्ध प्रतिक्रिया सिद्धान्त - इस सिद्धान्त के प्रवर्तक पावलव है। इस नियम के अनुसार शिक्षक को यह प्रयास करना चाहिए कि सीखने वाले सम्बन्धों को प्रत्यक्ष कर सके। जैसे - कार्य - कारण सम्बन्ध, ज्ञात से अज्ञात सम्बन्ध, नये से पुराने का सम्बन्ध, विशिष्ट से सामान्य का सम्बन्ध इत्यादि।
प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत - इस सिद्धान्त के प्रवर्तक थार्नडाइक है। इसमें साधन तथा साध्य के सम्बन्ध स्पष्ट न होकर अत्यन्त प्रच्छन्न एवं नहीं के बराबर होते हैं। इसमें सीखने की प्रक्रिया धीरे - धीरे तथा क्रमश: होती है। यह एक सुधार की विधि है। जो प्रयास सफल होंगे उनकी आवृत्ति करनी होगी जो असफल होंगे उन्हें या तो छोड़ देना होगा अथवा उनमें सुधार करना होगा।