Correct Answer:
Option C - ‘साहित्यसंगीतकलाविहीन: साक्षात्पशु: पुच्छविषाणहीन:’ उक्ति नीतिशतक से उद्धृत है। इसका तात्पर्य है साहित्य, संगीत एवं कला से हीन व्यक्ति सींग एवं पूँछ से रहित साक्षात् पुश के समान होता है। भर्तृहरि ने नीतिशतकम् की रचना की थी।
C. ‘साहित्यसंगीतकलाविहीन: साक्षात्पशु: पुच्छविषाणहीन:’ उक्ति नीतिशतक से उद्धृत है। इसका तात्पर्य है साहित्य, संगीत एवं कला से हीन व्यक्ति सींग एवं पूँछ से रहित साक्षात् पुश के समान होता है। भर्तृहरि ने नीतिशतकम् की रचना की थी।