Correct Answer:
Option C - ‘‘सच्चा प्रेम वही है, जिसकी तृप्ति आत्मबलि पर हो निर्भर। त्याग बिना निष्प्राण प्रेम है, करो प्रेम पर प्राण निछावर।।’’ इन पंक्तियों के रचयिता ‘रामनरेश त्रिपाठी’ है अन्य लेखकों की पक्तियाँ इस प्रकार हैं–
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ
– माखन लाल चतुर्वेदी
हो जाने दो गर्क नशे में मत पड़ने दो फर्क नशे में
– बालकृष्ण शर्मा नवीन
अटन का समय था, रजनि का उदय था – श्री पाठक
C. ‘‘सच्चा प्रेम वही है, जिसकी तृप्ति आत्मबलि पर हो निर्भर। त्याग बिना निष्प्राण प्रेम है, करो प्रेम पर प्राण निछावर।।’’ इन पंक्तियों के रचयिता ‘रामनरेश त्रिपाठी’ है अन्य लेखकों की पक्तियाँ इस प्रकार हैं–
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ
– माखन लाल चतुर्वेदी
हो जाने दो गर्क नशे में मत पड़ने दो फर्क नशे में
– बालकृष्ण शर्मा नवीन
अटन का समय था, रजनि का उदय था – श्री पाठक