Correct Answer:
Option D - ऋचाओं के क्रमबद्ध ज्ञान के संग्रह को ऋग्वेद कहते हैं। ऋग्वेद सबसे पुराना वेद है। इसमें 10 मण्डल, 1028 सूक्त (वालखिल्य पाठ के 11 सूक्त) एवं 10,462 ऋचाएँ (मंत्र) हैं। हालांकि मंत्रों/ऋचाओं की संख्या के बारे में विद्वानों में मतभेद है। इस वेद के ऋचाओं के पढ़ने वाले पुरोहित को होतृ कहते हैं।
विश्वामित्र द्वारा रचित ऋग्वेद के तीसरे मण्डल में सूर्य देवता सावित्री (सवितृ) को समर्पित प्रसिद्ध गायत्री मंत्र है। इसके 9वें मण्डल में देवता सोम का उल्लेख है।
D. ऋचाओं के क्रमबद्ध ज्ञान के संग्रह को ऋग्वेद कहते हैं। ऋग्वेद सबसे पुराना वेद है। इसमें 10 मण्डल, 1028 सूक्त (वालखिल्य पाठ के 11 सूक्त) एवं 10,462 ऋचाएँ (मंत्र) हैं। हालांकि मंत्रों/ऋचाओं की संख्या के बारे में विद्वानों में मतभेद है। इस वेद के ऋचाओं के पढ़ने वाले पुरोहित को होतृ कहते हैं।
विश्वामित्र द्वारा रचित ऋग्वेद के तीसरे मण्डल में सूर्य देवता सावित्री (सवितृ) को समर्पित प्रसिद्ध गायत्री मंत्र है। इसके 9वें मण्डल में देवता सोम का उल्लेख है।