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Q: ``स वर्णीलिंगी विदित: समाययौ युधिष्ठिरं द्वैतवने वनेचर:।।'' इस श्लोक में `वर्णीलिंगी ' शब्द का अर्थ है
  • A. ब्रह्मचारी
  • B. किरात
  • C. देवयोनि विशेष
  • D. विपरीत लिंग वाला
Correct Answer: Option A - यह श्लोक भारवि रचित किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के प्रथम अङ्क से उद्धृत है। जिसका अर्थ है-ब्रह्मचारी वेश वाला वनेचर युधिष्ठिर के पास गया। अत: वर्णलिङ्गी से तात्पर्य ब्रह्मचारी से है।
A. यह श्लोक भारवि रचित किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के प्रथम अङ्क से उद्धृत है। जिसका अर्थ है-ब्रह्मचारी वेश वाला वनेचर युधिष्ठिर के पास गया। अत: वर्णलिङ्गी से तात्पर्य ब्रह्मचारी से है।

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यह श्लोक भारवि रचित किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के प्रथम अङ्क से उद्धृत है। जिसका अर्थ है-ब्रह्मचारी वेश वाला वनेचर युधिष्ठिर के पास गया। अत: वर्णलिङ्गी से तात्पर्य ब्रह्मचारी से है।