Correct Answer:
Option D - रोलर बीयरिंग का प्रयोग प्रबलित कंक्रीट तथा स्टील ब्रिज संरचना में किया जा सकता है।
दोलक या रॉकर धारक (Rocker bearing)– रॉकर धारक 20 मी. पाट से ऊपर प्रयोग किया जाता है। यह पुल के मुख्य गर्डर को कोणीय गति, जो विक्षेपण के कारण होती है, लेने देता है। रॉकर बेयरिंग में दो शू (Top and bottom shoes) होते हैं जिनके मध्य 20 सेमी. व्यास की, इस्पात की एक बेलनाकार पिन लगी होती है। इसके लिए रॉकर के ऊपरी तथा निचले शू को भी पिन के व्यास के अनुसार गोलाई में रखा जाता है। भार आने पर जब मुख्य गर्डर नीचे झुकता है तो इसके साथ ऊपरी शू पिन पर घूम जाता है और पुल कोणीय गति लेने में सक्षम होता है।
D. रोलर बीयरिंग का प्रयोग प्रबलित कंक्रीट तथा स्टील ब्रिज संरचना में किया जा सकता है।
दोलक या रॉकर धारक (Rocker bearing)– रॉकर धारक 20 मी. पाट से ऊपर प्रयोग किया जाता है। यह पुल के मुख्य गर्डर को कोणीय गति, जो विक्षेपण के कारण होती है, लेने देता है। रॉकर बेयरिंग में दो शू (Top and bottom shoes) होते हैं जिनके मध्य 20 सेमी. व्यास की, इस्पात की एक बेलनाकार पिन लगी होती है। इसके लिए रॉकर के ऊपरी तथा निचले शू को भी पिन के व्यास के अनुसार गोलाई में रखा जाता है। भार आने पर जब मुख्य गर्डर नीचे झुकता है तो इसके साथ ऊपरी शू पिन पर घूम जाता है और पुल कोणीय गति लेने में सक्षम होता है।