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Q: Roller bearings have been used in ______. रोलर बियरिंग का उपयोग में ________ किया जाता है।
  • A. Not Suitable for Both Steel and Concrete Bridges/इस्पात और कंक्रीट सेतु दोनों के लिए उपयुक्त नहीं है।
  • B. Only Steel Bridges, Not in Concrete Bridges/केवल स्टील के पुल, कंक्रीट के पुलों में नहीं
  • C. Only Concrete Bridges, Not in Steel Bridges/केवल कंक्रीट के पुल, स्टील पुल में नहीं
  • D. Both Steel and Concrete Bridges/इस्पात तथा कंक्रीट पुल दोनों
Correct Answer: Option D - रोलर बीयरिंग का प्रयोग प्रबलित कंक्रीट तथा स्टील ब्रिज संरचना में किया जा सकता है। दोलक या रॉकर धारक (Rocker bearing)– रॉकर धारक 20 मी. पाट से ऊपर प्रयोग किया जाता है। यह पुल के मुख्य गर्डर को कोणीय गति, जो विक्षेपण के कारण होती है, लेने देता है। रॉकर बेयरिंग में दो शू (Top and bottom shoes) होते हैं जिनके मध्य 20 सेमी. व्यास की, इस्पात की एक बेलनाकार पिन लगी होती है। इसके लिए रॉकर के ऊपरी तथा निचले शू को भी पिन के व्यास के अनुसार गोलाई में रखा जाता है। भार आने पर जब मुख्य गर्डर नीचे झुकता है तो इसके साथ ऊपरी शू पिन पर घूम जाता है और पुल कोणीय गति लेने में सक्षम होता है।
D. रोलर बीयरिंग का प्रयोग प्रबलित कंक्रीट तथा स्टील ब्रिज संरचना में किया जा सकता है। दोलक या रॉकर धारक (Rocker bearing)– रॉकर धारक 20 मी. पाट से ऊपर प्रयोग किया जाता है। यह पुल के मुख्य गर्डर को कोणीय गति, जो विक्षेपण के कारण होती है, लेने देता है। रॉकर बेयरिंग में दो शू (Top and bottom shoes) होते हैं जिनके मध्य 20 सेमी. व्यास की, इस्पात की एक बेलनाकार पिन लगी होती है। इसके लिए रॉकर के ऊपरी तथा निचले शू को भी पिन के व्यास के अनुसार गोलाई में रखा जाता है। भार आने पर जब मुख्य गर्डर नीचे झुकता है तो इसके साथ ऊपरी शू पिन पर घूम जाता है और पुल कोणीय गति लेने में सक्षम होता है।

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रोलर बीयरिंग का प्रयोग प्रबलित कंक्रीट तथा स्टील ब्रिज संरचना में किया जा सकता है। दोलक या रॉकर धारक (Rocker bearing)– रॉकर धारक 20 मी. पाट से ऊपर प्रयोग किया जाता है। यह पुल के मुख्य गर्डर को कोणीय गति, जो विक्षेपण के कारण होती है, लेने देता है। रॉकर बेयरिंग में दो शू (Top and bottom shoes) होते हैं जिनके मध्य 20 सेमी. व्यास की, इस्पात की एक बेलनाकार पिन लगी होती है। इसके लिए रॉकर के ऊपरी तथा निचले शू को भी पिन के व्यास के अनुसार गोलाई में रखा जाता है। भार आने पर जब मुख्य गर्डर नीचे झुकता है तो इसके साथ ऊपरी शू पिन पर घूम जाता है और पुल कोणीय गति लेने में सक्षम होता है।