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Q: ‘‘ऋते रवे: क्षालयितुं क्षमेत् क: क्षपातमस्काण्ड मलीमसं नभ:।’’ यह उक्ति है
  • A. किरातार्जुनीय की
  • B. रघुवंश की
  • C. शिशुपालवध की
  • D. नैषध की
Correct Answer: Option C - ‘‘ऋते रवे: क्षालयितुं क्षमेत क: क्षपातमस्काण्डमलीमसं नभ:’’ यह उक्ति ‘शिशुपालवधम्’ से लिया गया है। अर्थात् - रात्रि के अन्धकार समूह से मलिन (बने हुए) आकाश को निर्मल करने के लिए सूर्य के बिना कौन समर्थ हो सकता है? यह नारद जी श्रीकृष्ण से कहते हैं। दुष्टों को दमन करने की क्षमता आप में ही है। शिशुपालवध महाकवि माघ की एक मात्र कृति है जो बृहत्त्रयी के अन्तर्गत गिनी जाती है।
C. ‘‘ऋते रवे: क्षालयितुं क्षमेत क: क्षपातमस्काण्डमलीमसं नभ:’’ यह उक्ति ‘शिशुपालवधम्’ से लिया गया है। अर्थात् - रात्रि के अन्धकार समूह से मलिन (बने हुए) आकाश को निर्मल करने के लिए सूर्य के बिना कौन समर्थ हो सकता है? यह नारद जी श्रीकृष्ण से कहते हैं। दुष्टों को दमन करने की क्षमता आप में ही है। शिशुपालवध महाकवि माघ की एक मात्र कृति है जो बृहत्त्रयी के अन्तर्गत गिनी जाती है।

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‘‘ऋते रवे: क्षालयितुं क्षमेत क: क्षपातमस्काण्डमलीमसं नभ:’’ यह उक्ति ‘शिशुपालवधम्’ से लिया गया है। अर्थात् - रात्रि के अन्धकार समूह से मलिन (बने हुए) आकाश को निर्मल करने के लिए सूर्य के बिना कौन समर्थ हो सकता है? यह नारद जी श्रीकृष्ण से कहते हैं। दुष्टों को दमन करने की क्षमता आप में ही है। शिशुपालवध महाकवि माघ की एक मात्र कृति है जो बृहत्त्रयी के अन्तर्गत गिनी जाती है।