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Q: रस निष्पत्ति के संबंध में ‘चित्रतुरंगन्याय’ की मान्यता किस आचार्य की है?
  • A. अभिनव गुप्त
  • B. श्रीशंकुक
  • C. भट्ट लोल्लट
  • D. भट्ट नायक
Correct Answer: Option B - व्याख्या- रस निष्पत्ति के संबंध में ‘चित्रतुरंग न्याय’ की मान्यता आचार्य शंकुक की है। आचार्य शंकुक ने रस की निष्पत्ति ‘अनुमिति’ में माना है। इनका मानना है कि रस की अवस्थिति अनुकर्ता (नट) में होती है। इनका सिद्धान्त अनुमतिवाद तथा दार्शनिक मत न्याय दर्शन पर आधारित है।
B. व्याख्या- रस निष्पत्ति के संबंध में ‘चित्रतुरंग न्याय’ की मान्यता आचार्य शंकुक की है। आचार्य शंकुक ने रस की निष्पत्ति ‘अनुमिति’ में माना है। इनका मानना है कि रस की अवस्थिति अनुकर्ता (नट) में होती है। इनका सिद्धान्त अनुमतिवाद तथा दार्शनिक मत न्याय दर्शन पर आधारित है।

Explanations:

व्याख्या- रस निष्पत्ति के संबंध में ‘चित्रतुरंग न्याय’ की मान्यता आचार्य शंकुक की है। आचार्य शंकुक ने रस की निष्पत्ति ‘अनुमिति’ में माना है। इनका मानना है कि रस की अवस्थिति अनुकर्ता (नट) में होती है। इनका सिद्धान्त अनुमतिवाद तथा दार्शनिक मत न्याय दर्शन पर आधारित है।