Correct Answer:
Option B - ‘रस की अनुभूति कराने में अभिधा शब्द शक्ति ही प्रधान है’। यह मान्यता आचार्य भट्टनायक की है। भट्टनायक ने रस सूत्र की व्याख्या के संदर्भ में काव्य को तीन शक्तियों की कल्पना की है- अभिधा, भावकत्व, भोजकत्व।
B. ‘रस की अनुभूति कराने में अभिधा शब्द शक्ति ही प्रधान है’। यह मान्यता आचार्य भट्टनायक की है। भट्टनायक ने रस सूत्र की व्याख्या के संदर्भ में काव्य को तीन शक्तियों की कल्पना की है- अभिधा, भावकत्व, भोजकत्व।