Correct Answer:
Option A - रामायणे जटायु प्रसङ्ग: प्रकरी अर्थप्रकृति: अस्ति । रामायण में जटायु का प्रसङ्ग प्रकरी अर्थ प्रकृति है। नाट्यशास्त्र में पाँच अर्थ प्रकृतियाँ होती हैं।
अर्थ प्रकृतय: प्रयोजन सिद्धि हेतव:।
बीजबिन्दु पताकाख्याप्रकरी कार्यलक्षण:।
अर्थ प्रकृतय: पञ्चता एता: परिकीर्तिता :।।
बीज, बिन्दु, पताका, प्रकरी, कार्य लक्षण पाँच अर्थ प्रकृतियाँ हैं जो प्रयोजन सिद्धि के हेतु हैं।
A. रामायणे जटायु प्रसङ्ग: प्रकरी अर्थप्रकृति: अस्ति । रामायण में जटायु का प्रसङ्ग प्रकरी अर्थ प्रकृति है। नाट्यशास्त्र में पाँच अर्थ प्रकृतियाँ होती हैं।
अर्थ प्रकृतय: प्रयोजन सिद्धि हेतव:।
बीजबिन्दु पताकाख्याप्रकरी कार्यलक्षण:।
अर्थ प्रकृतय: पञ्चता एता: परिकीर्तिता :।।
बीज, बिन्दु, पताका, प्रकरी, कार्य लक्षण पाँच अर्थ प्रकृतियाँ हैं जो प्रयोजन सिद्धि के हेतु हैं।