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Q: रामानुजाचार्य ने किस दर्शन का प्रतिपादन किया?
  • A. अद्वैतवाद
  • B. शुद्धाद्वैतवाद
  • C. विशिष्टाद्वैतवाद
  • D. द्वैतवाद
Correct Answer: Option C - वैष्णव भक्ति के आदि आचार्य रामानुजाचार्य माने जाते हैं। ये राम को विष्णु का अवतार मानते हैं। इनके सिद्धान्त को विशिष्टाद्वैतवाद कहते हैं। इनके गुरु का नाम यादव प्रकाश था। भक्ति को मुक्ति का साधन मानते हैं - `तत्वमसि' का अर्थ उन्होंने किया है, `तू उसका सेवक है' वे जीव को दास और ईश्वर को स्वामी मानते हैं। भगवान् की शरण में `दास्यभाव' से जाकर ही जीवात्मा का कल्याण होता है। उनके द्वारा प्रवर्तीत सम्प्रदाय को श्री सम्प्रदाय भी कहा जाता है।
C. वैष्णव भक्ति के आदि आचार्य रामानुजाचार्य माने जाते हैं। ये राम को विष्णु का अवतार मानते हैं। इनके सिद्धान्त को विशिष्टाद्वैतवाद कहते हैं। इनके गुरु का नाम यादव प्रकाश था। भक्ति को मुक्ति का साधन मानते हैं - `तत्वमसि' का अर्थ उन्होंने किया है, `तू उसका सेवक है' वे जीव को दास और ईश्वर को स्वामी मानते हैं। भगवान् की शरण में `दास्यभाव' से जाकर ही जीवात्मा का कल्याण होता है। उनके द्वारा प्रवर्तीत सम्प्रदाय को श्री सम्प्रदाय भी कहा जाता है।

Explanations:

वैष्णव भक्ति के आदि आचार्य रामानुजाचार्य माने जाते हैं। ये राम को विष्णु का अवतार मानते हैं। इनके सिद्धान्त को विशिष्टाद्वैतवाद कहते हैं। इनके गुरु का नाम यादव प्रकाश था। भक्ति को मुक्ति का साधन मानते हैं - `तत्वमसि' का अर्थ उन्होंने किया है, `तू उसका सेवक है' वे जीव को दास और ईश्वर को स्वामी मानते हैं। भगवान् की शरण में `दास्यभाव' से जाकर ही जीवात्मा का कल्याण होता है। उनके द्वारा प्रवर्तीत सम्प्रदाय को श्री सम्प्रदाय भी कहा जाता है।