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Q: राज्य सभा के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. राज्य सभा के मूल को 1919 के विगत वर्ष में खोजा जा सकता है, जब भारत सरकार अधिनियम, 1919 का अनुसरण करते हुए काउंसिल ऑफ स्टेट्स के नाम से जाने गए द्वितीय सदन का सृजन किया गया। 2. राज्य सभा को यह घोषित करने की विशिष्ट शाqक्तयाँ हैं कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक और समीचीन है कि संसद् राज्य सूची के किसी विषय के संदर्भ में विधियाँ निर्मित करे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  • A. केवल 1
  • B. केवल 2
  • C. 1 और 2 दोनों
  • D. न तो 1 और न ही 2
Correct Answer: Option C - भारत सरकार अधिनियम, 1919 द्वारा केंद्र में एक सदनीय विधान परिषद के स्थान पर दो सदन वाले विधान मण्डल की स्थापना की गई। दोनों सदनों के नाम केंद्रीय विधान सभा तथा राज्य परिषद था। अब केंद्रीय विधायिका के तीन अंग थे – गवर्नर जनरल, राज्य परिषद तथा केंद्रीय विधान सभा। इसी के मूल में राज्य सभा को खोजा जा सकता है। संविधान का अनुच्छेद 249(1) यह उपबन्ध करता है कि यदि राष्ट्रीय हित में आवश्यक हो तो राज्य सूची के किसी विषय के बाबत संघ अस्थायी विधान बना सकता है। इस विषय में संविधान ने राज्य सभा को विशेष भूमिका प्रदान की है।
C. भारत सरकार अधिनियम, 1919 द्वारा केंद्र में एक सदनीय विधान परिषद के स्थान पर दो सदन वाले विधान मण्डल की स्थापना की गई। दोनों सदनों के नाम केंद्रीय विधान सभा तथा राज्य परिषद था। अब केंद्रीय विधायिका के तीन अंग थे – गवर्नर जनरल, राज्य परिषद तथा केंद्रीय विधान सभा। इसी के मूल में राज्य सभा को खोजा जा सकता है। संविधान का अनुच्छेद 249(1) यह उपबन्ध करता है कि यदि राष्ट्रीय हित में आवश्यक हो तो राज्य सूची के किसी विषय के बाबत संघ अस्थायी विधान बना सकता है। इस विषय में संविधान ने राज्य सभा को विशेष भूमिका प्रदान की है।

Explanations:

भारत सरकार अधिनियम, 1919 द्वारा केंद्र में एक सदनीय विधान परिषद के स्थान पर दो सदन वाले विधान मण्डल की स्थापना की गई। दोनों सदनों के नाम केंद्रीय विधान सभा तथा राज्य परिषद था। अब केंद्रीय विधायिका के तीन अंग थे – गवर्नर जनरल, राज्य परिषद तथा केंद्रीय विधान सभा। इसी के मूल में राज्य सभा को खोजा जा सकता है। संविधान का अनुच्छेद 249(1) यह उपबन्ध करता है कि यदि राष्ट्रीय हित में आवश्यक हो तो राज्य सूची के किसी विषय के बाबत संघ अस्थायी विधान बना सकता है। इस विषय में संविधान ने राज्य सभा को विशेष भूमिका प्रदान की है।