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Q: ‘काव्यशोभाकरान् धर्मालंकारान् प्रचक्षते’ – अलंकार की यह परिभाषा किसकी है?
  • A. आचार्य दण्डी
  • B. आचार्य वामन
  • C. आचार्य कुंतक
  • D. आचार्य मम्मट
Correct Answer: Option A - ‘काव्यशोभाकरान् धर्मालंकारान् प्रचक्षते’ अलंकार की यह परिभाषा ‘आचार्य दण्डी’ की है। दण्डी अलंकार सम्प्रदाय से सम्बद्ध थे तथा ‘काव्यादर्श’ नामक ग्रंथ की रचना की। दण्डी ने काव्य के शोेभाकारक धर्म को अलंकार कहा है। आचार्य वामन रीति सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं। इन्होंने काव्यालंकार सूत्र ग्रंथ की रचना की। कुन्तक वक्रोक्ति सम्प्रदाय के प्रवर्तक माने जाते हैं और इनकी रचना ‘वक्रोक्तिजीवित’ है। मम्मट ने ‘काव्यप्रकाश’ नामक ‘ध्वनि विरोधी’ ग्रंथ की रचना की।
A. ‘काव्यशोभाकरान् धर्मालंकारान् प्रचक्षते’ अलंकार की यह परिभाषा ‘आचार्य दण्डी’ की है। दण्डी अलंकार सम्प्रदाय से सम्बद्ध थे तथा ‘काव्यादर्श’ नामक ग्रंथ की रचना की। दण्डी ने काव्य के शोेभाकारक धर्म को अलंकार कहा है। आचार्य वामन रीति सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं। इन्होंने काव्यालंकार सूत्र ग्रंथ की रचना की। कुन्तक वक्रोक्ति सम्प्रदाय के प्रवर्तक माने जाते हैं और इनकी रचना ‘वक्रोक्तिजीवित’ है। मम्मट ने ‘काव्यप्रकाश’ नामक ‘ध्वनि विरोधी’ ग्रंथ की रचना की।

Explanations:

‘काव्यशोभाकरान् धर्मालंकारान् प्रचक्षते’ अलंकार की यह परिभाषा ‘आचार्य दण्डी’ की है। दण्डी अलंकार सम्प्रदाय से सम्बद्ध थे तथा ‘काव्यादर्श’ नामक ग्रंथ की रचना की। दण्डी ने काव्य के शोेभाकारक धर्म को अलंकार कहा है। आचार्य वामन रीति सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं। इन्होंने काव्यालंकार सूत्र ग्रंथ की रचना की। कुन्तक वक्रोक्ति सम्प्रदाय के प्रवर्तक माने जाते हैं और इनकी रचना ‘वक्रोक्तिजीवित’ है। मम्मट ने ‘काव्यप्रकाश’ नामक ‘ध्वनि विरोधी’ ग्रंथ की रचना की।