Correct Answer:
Option C - भरतमुनि ने काव्य-गुणों की संख्या दस मानी है
भरतमुनि को संस्कृत काव्यशास्त्र का प्रथम आचार्य माना जाता है।
भरतमुनि की प्रसिद्ध रचना नाट्यशास्त्र है। इसे भरतमुनि ने ‘पंचमवेद’ भी कहा है।
नाट्यशास्त्र में 36 अध्याय तथा पाँच हजार श्लोक हैं।
भरतमुनि ने नाट्यशास्त्र में दस गुण, दस दोष तथा चार अलंकार (यमक, उपमा, रूपक तथा दीपक) की मीमांसा की है।
नाट्यशास्त्र के षष्ठम् एवं सप्तम् अध्याय में रस तथा भाव का वर्णन किया गया है। भरतमुनि ने रसों की संख्या आठ मानी है।
C. भरतमुनि ने काव्य-गुणों की संख्या दस मानी है
भरतमुनि को संस्कृत काव्यशास्त्र का प्रथम आचार्य माना जाता है।
भरतमुनि की प्रसिद्ध रचना नाट्यशास्त्र है। इसे भरतमुनि ने ‘पंचमवेद’ भी कहा है।
नाट्यशास्त्र में 36 अध्याय तथा पाँच हजार श्लोक हैं।
भरतमुनि ने नाट्यशास्त्र में दस गुण, दस दोष तथा चार अलंकार (यमक, उपमा, रूपक तथा दीपक) की मीमांसा की है।
नाट्यशास्त्र के षष्ठम् एवं सप्तम् अध्याय में रस तथा भाव का वर्णन किया गया है। भरतमुनि ने रसों की संख्या आठ मानी है।