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Q: निम्नलिखित में किसने 1802 में ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी के साथ बसीन की संधि की?
  • A. बालाजी विश्वनाथ
  • B. बाजी राव प्रथम
  • C. बालाजी बाजी राव
  • D. बाजी राव द्वितीय
Correct Answer: Option D - 1800 ई. में नाना फड़नवीश की मृत्यु के पश्चात मराठे अस्थिर हो गये तथा आपस में संघर्ष करने लगे। पेशवा बाजीराव द्वितीय (रघुनाथ राव का पुत्र) एक षड़यंत्रकारी व्यक्ति था सिन्धिया से पराजित होने के पश्चात् 31-12-1802 को अंग्रेजों के साथ बसीन की संधि किया, जिसके निम्न प्रावधान थें- (1) पेशवा ने ब्रिटिश संरक्षण स्वीकार कर ब्रिटिश सेना को पूना में रखना स्वीकार किया। (2) उसने गुजरात, ताप्ती तथा नर्मदा के मध्य के प्रदेश तथा तुंगभद्रा नदी के समीप के प्रदेश जिनकी आय 26 लाख रुपये थी कम्पनी को देना स्वीकार किया। (3) पेशवा ने सूरत नगर अंग्रेजों को सौंप दिया। (4) विदेशी मामले कम्पनी को दे दिये तथा ब्रिटिश विरोधी सभी यूरोपीय लोगों को सेना से बाहर कर दिया। इस संधि से ब्रिटिश सर्वोच्चता स्थापित हुई तथा कम्पनी को प्रत्यक्ष रूप से भारत का साम्राज्य मिला गया। सिंधिया तथा भोंसले जैसे मराठा नेताओं ने इसका प्रबल विरोध किया।
D. 1800 ई. में नाना फड़नवीश की मृत्यु के पश्चात मराठे अस्थिर हो गये तथा आपस में संघर्ष करने लगे। पेशवा बाजीराव द्वितीय (रघुनाथ राव का पुत्र) एक षड़यंत्रकारी व्यक्ति था सिन्धिया से पराजित होने के पश्चात् 31-12-1802 को अंग्रेजों के साथ बसीन की संधि किया, जिसके निम्न प्रावधान थें- (1) पेशवा ने ब्रिटिश संरक्षण स्वीकार कर ब्रिटिश सेना को पूना में रखना स्वीकार किया। (2) उसने गुजरात, ताप्ती तथा नर्मदा के मध्य के प्रदेश तथा तुंगभद्रा नदी के समीप के प्रदेश जिनकी आय 26 लाख रुपये थी कम्पनी को देना स्वीकार किया। (3) पेशवा ने सूरत नगर अंग्रेजों को सौंप दिया। (4) विदेशी मामले कम्पनी को दे दिये तथा ब्रिटिश विरोधी सभी यूरोपीय लोगों को सेना से बाहर कर दिया। इस संधि से ब्रिटिश सर्वोच्चता स्थापित हुई तथा कम्पनी को प्रत्यक्ष रूप से भारत का साम्राज्य मिला गया। सिंधिया तथा भोंसले जैसे मराठा नेताओं ने इसका प्रबल विरोध किया।

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1800 ई. में नाना फड़नवीश की मृत्यु के पश्चात मराठे अस्थिर हो गये तथा आपस में संघर्ष करने लगे। पेशवा बाजीराव द्वितीय (रघुनाथ राव का पुत्र) एक षड़यंत्रकारी व्यक्ति था सिन्धिया से पराजित होने के पश्चात् 31-12-1802 को अंग्रेजों के साथ बसीन की संधि किया, जिसके निम्न प्रावधान थें- (1) पेशवा ने ब्रिटिश संरक्षण स्वीकार कर ब्रिटिश सेना को पूना में रखना स्वीकार किया। (2) उसने गुजरात, ताप्ती तथा नर्मदा के मध्य के प्रदेश तथा तुंगभद्रा नदी के समीप के प्रदेश जिनकी आय 26 लाख रुपये थी कम्पनी को देना स्वीकार किया। (3) पेशवा ने सूरत नगर अंग्रेजों को सौंप दिया। (4) विदेशी मामले कम्पनी को दे दिये तथा ब्रिटिश विरोधी सभी यूरोपीय लोगों को सेना से बाहर कर दिया। इस संधि से ब्रिटिश सर्वोच्चता स्थापित हुई तथा कम्पनी को प्रत्यक्ष रूप से भारत का साम्राज्य मिला गया। सिंधिया तथा भोंसले जैसे मराठा नेताओं ने इसका प्रबल विरोध किया।