Correct Answer:
Option A - महालवाड़ी पद्धति में राजस्व व्यवस्था प्रत्येक महाल के साथ स्थापित की गयी थी। महाल से तात्पर्य जागीर अथवा गाँव से था। इस पद्धति का जन्मदाता ‘‘हाल्ट मैकेन्जी’’ को माना जाता है। 1822 ई. में इस व्यवस्था को कानूनी मान्यता प्रदान कर दी गयी। इस प्रणाली के तहत भू-राजस्व को समय-समय पर संशोधित किया जाता है। इस व्यवस्था में गाँव या जागीरों के मुखिया या लम्बरदार को कर वसूली का आधार बनाया गया। इस प्रणाली में जमींदारों का कोई योगदान नहीं था। महालवाड़ी व्यवस्था के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब प्रांत आते थे, जो ब्रिटिश भारत के कुल भाग का 30% था।
A. महालवाड़ी पद्धति में राजस्व व्यवस्था प्रत्येक महाल के साथ स्थापित की गयी थी। महाल से तात्पर्य जागीर अथवा गाँव से था। इस पद्धति का जन्मदाता ‘‘हाल्ट मैकेन्जी’’ को माना जाता है। 1822 ई. में इस व्यवस्था को कानूनी मान्यता प्रदान कर दी गयी। इस प्रणाली के तहत भू-राजस्व को समय-समय पर संशोधित किया जाता है। इस व्यवस्था में गाँव या जागीरों के मुखिया या लम्बरदार को कर वसूली का आधार बनाया गया। इस प्रणाली में जमींदारों का कोई योगदान नहीं था। महालवाड़ी व्यवस्था के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब प्रांत आते थे, जो ब्रिटिश भारत के कुल भाग का 30% था।