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Q: ‘राजराज’ इति शब्दस्य कोऽर्थ:?
  • A. इन्द्र:
  • B. कुबेर:
  • C. शिव:
  • D. विष्णु:
Correct Answer: Option B - : ‘राजराज’ इति शब्दस्य कुबेर:अर्थ:। ‘तस्य स्थित्वा कथमपि पुर: कौतुकाधानहेतो रन्तर्वाष्पश्चिरमनुचरो राजराजस्य दध्यौ। मेघालोके भवति सुखिनोऽप्यन्यथावृत्ति चेत: कण्ठाश्लेषप्रणयिनि जने विंâ पुनर्दूरसंस्थे।’’ अर्थात् यक्षों के राजा कुबेर का सेवक आँखों के अन्दर ही आँसुओं को रोके हुए, उत्कण्ठा को उत्पन्न करने वाले उस मेघ के सामने किसी प्रकार ठहरकर देर तक सोचता रहा। मेघ के दर्शन होने पर सुखी व्यक्ति का भी चित्त दूसरे प्रकार की वृत्ति वाला हो जाता है, फिर कण्ठ के आलिङ्गन के इच्छुक जनप्रिया के दूर स्थित होने पर तो कहना ही क्या। यहाँ राजराजस्य का अर्थ यक्षराज कुबेर है।
B. : ‘राजराज’ इति शब्दस्य कुबेर:अर्थ:। ‘तस्य स्थित्वा कथमपि पुर: कौतुकाधानहेतो रन्तर्वाष्पश्चिरमनुचरो राजराजस्य दध्यौ। मेघालोके भवति सुखिनोऽप्यन्यथावृत्ति चेत: कण्ठाश्लेषप्रणयिनि जने विंâ पुनर्दूरसंस्थे।’’ अर्थात् यक्षों के राजा कुबेर का सेवक आँखों के अन्दर ही आँसुओं को रोके हुए, उत्कण्ठा को उत्पन्न करने वाले उस मेघ के सामने किसी प्रकार ठहरकर देर तक सोचता रहा। मेघ के दर्शन होने पर सुखी व्यक्ति का भी चित्त दूसरे प्रकार की वृत्ति वाला हो जाता है, फिर कण्ठ के आलिङ्गन के इच्छुक जनप्रिया के दूर स्थित होने पर तो कहना ही क्या। यहाँ राजराजस्य का अर्थ यक्षराज कुबेर है।

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: ‘राजराज’ इति शब्दस्य कुबेर:अर्थ:। ‘तस्य स्थित्वा कथमपि पुर: कौतुकाधानहेतो रन्तर्वाष्पश्चिरमनुचरो राजराजस्य दध्यौ। मेघालोके भवति सुखिनोऽप्यन्यथावृत्ति चेत: कण्ठाश्लेषप्रणयिनि जने विंâ पुनर्दूरसंस्थे।’’ अर्थात् यक्षों के राजा कुबेर का सेवक आँखों के अन्दर ही आँसुओं को रोके हुए, उत्कण्ठा को उत्पन्न करने वाले उस मेघ के सामने किसी प्रकार ठहरकर देर तक सोचता रहा। मेघ के दर्शन होने पर सुखी व्यक्ति का भी चित्त दूसरे प्रकार की वृत्ति वाला हो जाता है, फिर कण्ठ के आलिङ्गन के इच्छुक जनप्रिया के दूर स्थित होने पर तो कहना ही क्या। यहाँ राजराजस्य का अर्थ यक्षराज कुबेर है।