Correct Answer:
Option A - कादम्बरी के शुकनासोपदेश: में राजप्रकृति को विह्वला के रूप में वर्णित किया गया है। राज प्रकृति के बारे में कादम्बरी के शुकनासोपदेश में कहा गया है कि – ‘‘राज्य–सुखरूपी निद्रा रात्रि के चले जाने पर भी कभी नहीं टूटती।
A. कादम्बरी के शुकनासोपदेश: में राजप्रकृति को विह्वला के रूप में वर्णित किया गया है। राज प्रकृति के बारे में कादम्बरी के शुकनासोपदेश में कहा गया है कि – ‘‘राज्य–सुखरूपी निद्रा रात्रि के चले जाने पर भी कभी नहीं टूटती।