Explanations:
उच्च घरानों में राजा रवि वर्मा के चित्रों की माँग इतनी अधिक थी कि वे उसे अपने जीवनकाल में पूर्ण नहीं कर सकते थे। अत: सर माधवराव की सहायता से उन्होंने सन् 1894 में बम्बई के उपनगर `घाटकोपर' में अपनी `लिथोग्राफी' प्रेस खोलकर चित्रों की प्रतिकृतियाँ छपवाईं , फलस्वरूप इनके चित्रों का मूल्य सस्ता हो गया और इनके चित्र घर-घर फैल गए। इस तरह राजा रवि वर्मा देश के पहले `लिथोग्राफर' बने व विस्तृत पैमाने पर मुद्रण के एक नये युग का सूत्रपात हुआ।