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Q: ‘रहिमन पानी राखिए, बिनु पानी सब सून। पानी गये न ऊबरै, मोती मानुष चून।’ इन पंक्तियों में किस छंद का प्रयोग हुआ है?
  • A. दोहा
  • B. गीतिका
  • C. चौपाई
  • D. कवित्त
Correct Answer: Option A - प्रश्नोक्त पंक्ति दोहा छन्द का उदाहरण है। दोहा अर्धसम मात्रिक छन्द है। दोहा के प्रथम व तृतीय चरण में 13-13 तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएँ होती है। शेष का विवरण इस प्रकार हैं- गीतिका– यह मात्रिक छन्द है। इसके चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 14 और 12 मात्राओं पर यति होती है। यह कुल 26 मात्रा वाला छन्द है। अन्त में क्रमश: लघु-गुरु होता है। चौपाई– यह सममात्रिक छन्द है। इसके प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती है। अन्त में दो गुरु वर्ण होते हैं। जगण-तगण का अन्त में आना वर्जित है। कवित्त– यह वर्णिक छन्द है, इसके प्रत्येक चरण में 31-31 या 32-32 या 33-33 वर्ण रहते हैं। मनहरण, रूपघनाक्षरी, देवघनाक्षरी इसके भेद है।
A. प्रश्नोक्त पंक्ति दोहा छन्द का उदाहरण है। दोहा अर्धसम मात्रिक छन्द है। दोहा के प्रथम व तृतीय चरण में 13-13 तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएँ होती है। शेष का विवरण इस प्रकार हैं- गीतिका– यह मात्रिक छन्द है। इसके चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 14 और 12 मात्राओं पर यति होती है। यह कुल 26 मात्रा वाला छन्द है। अन्त में क्रमश: लघु-गुरु होता है। चौपाई– यह सममात्रिक छन्द है। इसके प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती है। अन्त में दो गुरु वर्ण होते हैं। जगण-तगण का अन्त में आना वर्जित है। कवित्त– यह वर्णिक छन्द है, इसके प्रत्येक चरण में 31-31 या 32-32 या 33-33 वर्ण रहते हैं। मनहरण, रूपघनाक्षरी, देवघनाक्षरी इसके भेद है।

Explanations:

प्रश्नोक्त पंक्ति दोहा छन्द का उदाहरण है। दोहा अर्धसम मात्रिक छन्द है। दोहा के प्रथम व तृतीय चरण में 13-13 तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएँ होती है। शेष का विवरण इस प्रकार हैं- गीतिका– यह मात्रिक छन्द है। इसके चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 14 और 12 मात्राओं पर यति होती है। यह कुल 26 मात्रा वाला छन्द है। अन्त में क्रमश: लघु-गुरु होता है। चौपाई– यह सममात्रिक छन्द है। इसके प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती है। अन्त में दो गुरु वर्ण होते हैं। जगण-तगण का अन्त में आना वर्जित है। कवित्त– यह वर्णिक छन्द है, इसके प्रत्येक चरण में 31-31 या 32-32 या 33-33 वर्ण रहते हैं। मनहरण, रूपघनाक्षरी, देवघनाक्षरी इसके भेद है।