Correct Answer:
Option A - गंगा का आरम्भ भागीरथी व अलकनन्दा के रूप में होता है। अलकनन्दा की दो धाराएँ धौलीगंगा और विष्णुगंगा हैं जिनका संगम ‘विष्णु प्रयाग’ में होता है। आगे प्रवाहित होते हुए ‘कर्ण प्रयाग’ में पिण्डार नदी व ‘रुद्र प्रयाग’ में मन्दाकिनी नदी, अलकनन्दा से संगम करती हैं तथा ‘देव प्रयाग’ में भागीरथी व अलकनन्दा का संगम होता है जिसके पश्चात् इस संयुक्त धारा को ‘गंगा’ के नाम से जाना जाता है। भागीरथी का उद्गम गंगोत्री हिमनद के ‘गोमुख’ नामक स्थान से होता है। प्रसिद्ध बद्रीनाथ की घाटी जो हिन्दुओं का पवित्र तीर्थ स्थल है अलकनन्दा के तट पर स्थित है। केदारनाथ पीठ आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित पीठों में शामिल नहीं किया गया है। शंकराचार्य द्वारा भारत के चारों दिशाओं में स्थापित चार पीठ (मठ) प्रमुख निम्न हैं–
1. बद्रीनाथ ज्योतिर्मठ (उत्तराखण्ड) – उत्तर दिशा
2. द्वारका शारदा मठ (गुजरात) – पश्चिम दिशा
3. जगन्नाथ पुरी मठ (ओडिशा) – पूर्व दिशा
4. शृंगेरी गोवर्धन मठ (कर्नाटक) – दक्षिण दिशा
A. गंगा का आरम्भ भागीरथी व अलकनन्दा के रूप में होता है। अलकनन्दा की दो धाराएँ धौलीगंगा और विष्णुगंगा हैं जिनका संगम ‘विष्णु प्रयाग’ में होता है। आगे प्रवाहित होते हुए ‘कर्ण प्रयाग’ में पिण्डार नदी व ‘रुद्र प्रयाग’ में मन्दाकिनी नदी, अलकनन्दा से संगम करती हैं तथा ‘देव प्रयाग’ में भागीरथी व अलकनन्दा का संगम होता है जिसके पश्चात् इस संयुक्त धारा को ‘गंगा’ के नाम से जाना जाता है। भागीरथी का उद्गम गंगोत्री हिमनद के ‘गोमुख’ नामक स्थान से होता है। प्रसिद्ध बद्रीनाथ की घाटी जो हिन्दुओं का पवित्र तीर्थ स्थल है अलकनन्दा के तट पर स्थित है। केदारनाथ पीठ आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित पीठों में शामिल नहीं किया गया है। शंकराचार्य द्वारा भारत के चारों दिशाओं में स्थापित चार पीठ (मठ) प्रमुख निम्न हैं–
1. बद्रीनाथ ज्योतिर्मठ (उत्तराखण्ड) – उत्तर दिशा
2. द्वारका शारदा मठ (गुजरात) – पश्चिम दिशा
3. जगन्नाथ पुरी मठ (ओडिशा) – पूर्व दिशा
4. शृंगेरी गोवर्धन मठ (कर्नाटक) – दक्षिण दिशा