Correct Answer:
Option A - ‘रुच्यर्थानां प्रीयमाण:’ इस सूत्र से चतुर्थी विभक्ति का विधान किया जाता है। रुचि धातु एवं इसके समान अर्थ वाली धातुओं के योग में प्रीयमाण की सम्प्रदान सञ्ज्ञा होती है तथा चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है।
A. ‘रुच्यर्थानां प्रीयमाण:’ इस सूत्र से चतुर्थी विभक्ति का विधान किया जाता है। रुचि धातु एवं इसके समान अर्थ वाली धातुओं के योग में प्रीयमाण की सम्प्रदान सञ्ज्ञा होती है तथा चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है।