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Q: Quit India Movement was reaction of- ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ फल था- 1. The disappointment of Indians against Cripps Mission/ क्रिप्स के प्रस्तावों से भारतीयों के नैराश्य का 2. The threat of Japanese attack on India भारत पर जापानी आक्रमण की धमकी का 3. To provoke countrymen to adopt violent means by Gandhiji’s articles/गांधीजी के लेखों में देशवासियों को हिंसक साधन अपनाने के लिए भड़काने का 4. Due to passing the proposal of August, 1942 by AICC ए.आई.सी.सी. द्वारा अगस्त, 1942 में एक प्रस्ताव पारित करने का Choose the answer using the given options- नीचे दिए गए कूटो का प्रयोग करके सही उत्तर का चयन कीजिए- Code/कूट :
  • A. 1 and 2/1 और 2
  • B. 1,2 and 4/1, 2 और 4
  • C. 2,3 and 4/2, 3 और 4
  • D. All of the above/उपर्युक्त सभी
Correct Answer: Option B - 1942 में आए क्रिप्स प्रस्तावों की विफलता तथा जापानी आक्रमण के बढ़ते खतरे ने भारतीय जनमानस को निराशा तथा बेचैन कर दिया। इसी परिस्थिति में 14 जुलाई, 1942 ई. को वर्धा में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ पर एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसकी अध्यक्षता तत्कालीन अध्यक्ष अबुल कलाम आजाद ने किया था। 8 अगस्त, 1942 ई. को ऑल इण्डिया कांग्रेस कमेटी द्वारा वर्धा प्रस्तावों की पुष्टि कर दी गयी। कांग्रेस ने थोड़े बहुत संशोधनों के बाद 8 अगस्त, 1942 ई. को भारत छोड़ो प्रस्ताव पास कर दिया। गाँधीजी ने देशवासियों से यह कहा था कि किसी भी परिस्थिति में यह आन्दोलन रोका नहीं जाएगा। यहीं पर उन्होंने ‘करो या मरो’ का नारा दिया था।
B. 1942 में आए क्रिप्स प्रस्तावों की विफलता तथा जापानी आक्रमण के बढ़ते खतरे ने भारतीय जनमानस को निराशा तथा बेचैन कर दिया। इसी परिस्थिति में 14 जुलाई, 1942 ई. को वर्धा में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ पर एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसकी अध्यक्षता तत्कालीन अध्यक्ष अबुल कलाम आजाद ने किया था। 8 अगस्त, 1942 ई. को ऑल इण्डिया कांग्रेस कमेटी द्वारा वर्धा प्रस्तावों की पुष्टि कर दी गयी। कांग्रेस ने थोड़े बहुत संशोधनों के बाद 8 अगस्त, 1942 ई. को भारत छोड़ो प्रस्ताव पास कर दिया। गाँधीजी ने देशवासियों से यह कहा था कि किसी भी परिस्थिति में यह आन्दोलन रोका नहीं जाएगा। यहीं पर उन्होंने ‘करो या मरो’ का नारा दिया था।

Explanations:

1942 में आए क्रिप्स प्रस्तावों की विफलता तथा जापानी आक्रमण के बढ़ते खतरे ने भारतीय जनमानस को निराशा तथा बेचैन कर दिया। इसी परिस्थिति में 14 जुलाई, 1942 ई. को वर्धा में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ पर एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसकी अध्यक्षता तत्कालीन अध्यक्ष अबुल कलाम आजाद ने किया था। 8 अगस्त, 1942 ई. को ऑल इण्डिया कांग्रेस कमेटी द्वारा वर्धा प्रस्तावों की पुष्टि कर दी गयी। कांग्रेस ने थोड़े बहुत संशोधनों के बाद 8 अगस्त, 1942 ई. को भारत छोड़ो प्रस्ताव पास कर दिया। गाँधीजी ने देशवासियों से यह कहा था कि किसी भी परिस्थिति में यह आन्दोलन रोका नहीं जाएगा। यहीं पर उन्होंने ‘करो या मरो’ का नारा दिया था।