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Q: Puberty refers to the physical changes that take place during ______. यौवन __________ के दौरान होने वाले शारीरिक परिवर्तनों को संदर्भित करता है। I. Early part of adolescence I. किशोरावस्था के प्रारंभिक भाग। II. Childhood II. बचपन।
  • A. Both I and II/I तथा II दोनों
  • B. Only II/केवल II
  • C. Only I/केवल I
  • D. Neither I nor II/ना ही I ना ही II
Correct Answer: Option C - यौवन किशोरावस्था के प्रारंभिक भाग के दौरान होने वाले शारीरिक परिवर्तनों को संदर्भित करता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार किशोरावस्था यौनिक परिपक्वता से प्रारम्भ होती है और वैधानिक परिपक्वता पर समाप्त हो जाती है। Stanley Hall के अनुसार, ‘‘किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तूफान व विरोध की अवस्था है।’’ किशोरावस्था के विकासात्मक कार्यों का केन्द्र बिन्दु बाल्यकालीन अभिव्यक्तियों व व्यवहार को त्यागकर प्रौढ़ोचित व्यवहार को सीखना है। किशोरों को पुरुषोचित या स्त्रियोचित भूमिका सीख लेना चाहिए ताकि वह अपने भविष्य में सहभागिता दिखा सवेंâ। यह अवस्था संवेगात्मक रूप से कई कारणों से अधिक संवेदनशील तथा महत्वपूर्ण होती हैं यही कारण है कि मनौवैज्ञानिकों ने किशोरावस्था को ‘आँधी और तनाव’ की अवस्था की संज्ञा दी जाती है। अत: केवल I सही है।
C. यौवन किशोरावस्था के प्रारंभिक भाग के दौरान होने वाले शारीरिक परिवर्तनों को संदर्भित करता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार किशोरावस्था यौनिक परिपक्वता से प्रारम्भ होती है और वैधानिक परिपक्वता पर समाप्त हो जाती है। Stanley Hall के अनुसार, ‘‘किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तूफान व विरोध की अवस्था है।’’ किशोरावस्था के विकासात्मक कार्यों का केन्द्र बिन्दु बाल्यकालीन अभिव्यक्तियों व व्यवहार को त्यागकर प्रौढ़ोचित व्यवहार को सीखना है। किशोरों को पुरुषोचित या स्त्रियोचित भूमिका सीख लेना चाहिए ताकि वह अपने भविष्य में सहभागिता दिखा सवेंâ। यह अवस्था संवेगात्मक रूप से कई कारणों से अधिक संवेदनशील तथा महत्वपूर्ण होती हैं यही कारण है कि मनौवैज्ञानिकों ने किशोरावस्था को ‘आँधी और तनाव’ की अवस्था की संज्ञा दी जाती है। अत: केवल I सही है।

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यौवन किशोरावस्था के प्रारंभिक भाग के दौरान होने वाले शारीरिक परिवर्तनों को संदर्भित करता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार किशोरावस्था यौनिक परिपक्वता से प्रारम्भ होती है और वैधानिक परिपक्वता पर समाप्त हो जाती है। Stanley Hall के अनुसार, ‘‘किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तूफान व विरोध की अवस्था है।’’ किशोरावस्था के विकासात्मक कार्यों का केन्द्र बिन्दु बाल्यकालीन अभिव्यक्तियों व व्यवहार को त्यागकर प्रौढ़ोचित व्यवहार को सीखना है। किशोरों को पुरुषोचित या स्त्रियोचित भूमिका सीख लेना चाहिए ताकि वह अपने भविष्य में सहभागिता दिखा सवेंâ। यह अवस्था संवेगात्मक रूप से कई कारणों से अधिक संवेदनशील तथा महत्वपूर्ण होती हैं यही कारण है कि मनौवैज्ञानिकों ने किशोरावस्था को ‘आँधी और तनाव’ की अवस्था की संज्ञा दी जाती है। अत: केवल I सही है।