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Q: 'रिंग ऑफ फायर’ (अग्नि वलय) के बारे में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 1. यह अभिसरण पट्टिका सीमाओं का क्षेत्र है 2. यह एक सक्रिय भूकंपी एवं ज्वालामुखी क्षेत्र है 3. यह गहरी (गंभीर) खाई से संबंधित है नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
  • A. केवल 1 और 2
  • B. केवल 2 और 3
  • C. केवल 1
  • D. 1, 2 और 3
Correct Answer: Option D - विश्व के ज्वालामुखियों का लगभग 2/3 भाग प्रशान्त महासागर के दोनों तटीय भागों, द्वीप चापों तथा समुद्री द्वीपों के सहारे पाया जाता है। जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ (अग्नि वलय) या प्रशान्त महासागर का अग्नि वलय कहा जाता है। यह अभिसरण पट्टिकाओं (प्लेटों) का क्षेत्र है, अर्थात् यहाँ महाद्वीपीय व महासागरीय प्लेटें एक दूसरे के निकट आती हैं एवं आपस में टकराती हैं। महासागरीय प्लेट अधिक भारी होने के कारण महाद्वीपीय प्लेट के नीचे अधिगमित हो जाती हैं, जिससे गहरी खाई (Trench) या गर्त का निर्माण होता है। अधिगमित क्षेत्र में पिघला हुआ मैग्मा ही भू-पर्पटी को तोड़ते हुये ज्वालामुखी का निर्माण करते हैं। प्लेट किनारों के अभिसरित होने से भूकंपीय घटनायें भी अधिक होती हैं।
D. विश्व के ज्वालामुखियों का लगभग 2/3 भाग प्रशान्त महासागर के दोनों तटीय भागों, द्वीप चापों तथा समुद्री द्वीपों के सहारे पाया जाता है। जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ (अग्नि वलय) या प्रशान्त महासागर का अग्नि वलय कहा जाता है। यह अभिसरण पट्टिकाओं (प्लेटों) का क्षेत्र है, अर्थात् यहाँ महाद्वीपीय व महासागरीय प्लेटें एक दूसरे के निकट आती हैं एवं आपस में टकराती हैं। महासागरीय प्लेट अधिक भारी होने के कारण महाद्वीपीय प्लेट के नीचे अधिगमित हो जाती हैं, जिससे गहरी खाई (Trench) या गर्त का निर्माण होता है। अधिगमित क्षेत्र में पिघला हुआ मैग्मा ही भू-पर्पटी को तोड़ते हुये ज्वालामुखी का निर्माण करते हैं। प्लेट किनारों के अभिसरित होने से भूकंपीय घटनायें भी अधिक होती हैं।

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विश्व के ज्वालामुखियों का लगभग 2/3 भाग प्रशान्त महासागर के दोनों तटीय भागों, द्वीप चापों तथा समुद्री द्वीपों के सहारे पाया जाता है। जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ (अग्नि वलय) या प्रशान्त महासागर का अग्नि वलय कहा जाता है। यह अभिसरण पट्टिकाओं (प्लेटों) का क्षेत्र है, अर्थात् यहाँ महाद्वीपीय व महासागरीय प्लेटें एक दूसरे के निकट आती हैं एवं आपस में टकराती हैं। महासागरीय प्लेट अधिक भारी होने के कारण महाद्वीपीय प्लेट के नीचे अधिगमित हो जाती हैं, जिससे गहरी खाई (Trench) या गर्त का निर्माण होता है। अधिगमित क्षेत्र में पिघला हुआ मैग्मा ही भू-पर्पटी को तोड़ते हुये ज्वालामुखी का निर्माण करते हैं। प्लेट किनारों के अभिसरित होने से भूकंपीय घटनायें भी अधिक होती हैं।