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Q: ‘पदं हि सर्वत्र गुणैर्निधीयते’ ? – सूक्तिरियं कस्य ग्रन्थस्य वर्तते?
  • A. उत्तररामचरितस्य
  • B. पञ्चतन्त्रस्य
  • C. हितोपदेशस्य
  • D. रघुवंशस्य
Correct Answer: Option D - ‘पदं हि सर्वत्र गुणैर्निधीयते’ सूक्तिरियं ‘रघुवंशस्य’ ग्रन्थस्य वर्तते। अर्थात् गुणों का आदर सर्वत्र होता ही है यह सूक्ति रघुवंश महाकाव्य से ली गयी है। रघुवंश कालिदास द्वारा रचित संस्कृत महाकाव्य है। रघुवंश के 19 सर्गों में दिलीप से लेकर अग्निवर्ण तक रघुवंश के 29 राजाओं का वर्णन है। मनु और इक्ष्वाकु सहित कुल 31 राजाओं का वर्णन मिलता है। – रघुवंश पर मल्लिनाथ द्वारा रचित टीका ‘सञ्जीवनी’ है। – रघुवंश के आरम्भ में कवि ने पार्वती और शिव की आराधना (वन्दना) किया है।
D. ‘पदं हि सर्वत्र गुणैर्निधीयते’ सूक्तिरियं ‘रघुवंशस्य’ ग्रन्थस्य वर्तते। अर्थात् गुणों का आदर सर्वत्र होता ही है यह सूक्ति रघुवंश महाकाव्य से ली गयी है। रघुवंश कालिदास द्वारा रचित संस्कृत महाकाव्य है। रघुवंश के 19 सर्गों में दिलीप से लेकर अग्निवर्ण तक रघुवंश के 29 राजाओं का वर्णन है। मनु और इक्ष्वाकु सहित कुल 31 राजाओं का वर्णन मिलता है। – रघुवंश पर मल्लिनाथ द्वारा रचित टीका ‘सञ्जीवनी’ है। – रघुवंश के आरम्भ में कवि ने पार्वती और शिव की आराधना (वन्दना) किया है।

Explanations:

‘पदं हि सर्वत्र गुणैर्निधीयते’ सूक्तिरियं ‘रघुवंशस्य’ ग्रन्थस्य वर्तते। अर्थात् गुणों का आदर सर्वत्र होता ही है यह सूक्ति रघुवंश महाकाव्य से ली गयी है। रघुवंश कालिदास द्वारा रचित संस्कृत महाकाव्य है। रघुवंश के 19 सर्गों में दिलीप से लेकर अग्निवर्ण तक रघुवंश के 29 राजाओं का वर्णन है। मनु और इक्ष्वाकु सहित कुल 31 राजाओं का वर्णन मिलता है। – रघुवंश पर मल्लिनाथ द्वारा रचित टीका ‘सञ्जीवनी’ है। – रघुवंश के आरम्भ में कवि ने पार्वती और शिव की आराधना (वन्दना) किया है।