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Q: ‘पुटपाकप्रतीकाशो रामस्य करुणो रस:’ इतीयमुक्तिरस्ति उत्तररामचरिते
  • A. मुरलाया:
  • B. तमसाया:
  • C. गोदावर्या:
  • D. सीताया:
Correct Answer: Option A - ‘पुटपाकप्रतीकाशो रामस्य करुणो रस:’ इतीयम् उक्ति : मुरलाया: अस्ति उत्तररामचरिते। यह सूक्ति भवभूति कृत उत्तररामचरितम् के तृतीय अंक का पहला श्लोक है। इस श्लोक में मुरला तमसा से कहती है कि ‘राम का करुण रस पुटपाक के तुल्य है।’ यह लोपामुद्रा का सन्देश है इसमें अनुष्टुप् छन्द तथा उपमा अलंकार है।
A. ‘पुटपाकप्रतीकाशो रामस्य करुणो रस:’ इतीयम् उक्ति : मुरलाया: अस्ति उत्तररामचरिते। यह सूक्ति भवभूति कृत उत्तररामचरितम् के तृतीय अंक का पहला श्लोक है। इस श्लोक में मुरला तमसा से कहती है कि ‘राम का करुण रस पुटपाक के तुल्य है।’ यह लोपामुद्रा का सन्देश है इसमें अनुष्टुप् छन्द तथा उपमा अलंकार है।

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‘पुटपाकप्रतीकाशो रामस्य करुणो रस:’ इतीयम् उक्ति : मुरलाया: अस्ति उत्तररामचरिते। यह सूक्ति भवभूति कृत उत्तररामचरितम् के तृतीय अंक का पहला श्लोक है। इस श्लोक में मुरला तमसा से कहती है कि ‘राम का करुण रस पुटपाक के तुल्य है।’ यह लोपामुद्रा का सन्देश है इसमें अनुष्टुप् छन्द तथा उपमा अलंकार है।