Correct Answer:
Option A - संविधानों की दुनिया में ब्रिटिश संविधान का ही अत्यधिक महत्व है। मुनरों ने लिखा है– ‘ब्रिटिश संविधान संविधानों का जनक है और ब्रिटिश संसद संसदों की जननी है’। अन्य देशों की विधान सभाओं की चाहे कोई भी संज्ञा हो, पर उनका उद्गम स्त्रोत एक ही है। एशिया, अफ्रीका आदि दूरस्थ प्रदेशों में फैले ब्रिटेन के उपनिवेशों के सम्बंधों का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष प्रभाव ब्रिटिश संवैधानिक व्यवस्था पर तथा ब्रिटिश संवैधानिक व्यवस्था का प्रभाव उन उपनिवेशों की व्यवस्था पर सदैव पड़ता रहा है। इसके अतिरिक्त जहाँ-जहाँ ब्रिटेन का साम्राज्य रहा है और बाद में यदि वहाँ के लोगों को स्वतंत्रता मिली तो वहाँ प्राय: ब्रिटिश पद्धति पर आधारित संसदीय शासन प्रणाली को ही अपनाया गया है। यही कारण है कि ‘ब्रिटिश संविधान को मातृ संविधान’ कहा जाता है।
A. संविधानों की दुनिया में ब्रिटिश संविधान का ही अत्यधिक महत्व है। मुनरों ने लिखा है– ‘ब्रिटिश संविधान संविधानों का जनक है और ब्रिटिश संसद संसदों की जननी है’। अन्य देशों की विधान सभाओं की चाहे कोई भी संज्ञा हो, पर उनका उद्गम स्त्रोत एक ही है। एशिया, अफ्रीका आदि दूरस्थ प्रदेशों में फैले ब्रिटेन के उपनिवेशों के सम्बंधों का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष प्रभाव ब्रिटिश संवैधानिक व्यवस्था पर तथा ब्रिटिश संवैधानिक व्यवस्था का प्रभाव उन उपनिवेशों की व्यवस्था पर सदैव पड़ता रहा है। इसके अतिरिक्त जहाँ-जहाँ ब्रिटेन का साम्राज्य रहा है और बाद में यदि वहाँ के लोगों को स्वतंत्रता मिली तो वहाँ प्राय: ब्रिटिश पद्धति पर आधारित संसदीय शासन प्रणाली को ही अपनाया गया है। यही कारण है कि ‘ब्रिटिश संविधान को मातृ संविधान’ कहा जाता है।