Explanations:
एक शुद्ध अर्द्धचालक में धारा का प्रवाह होल्स और इलेक्ट्रॉन्स दोनों के द्वारा होता हैं। शुद्ध अर्द्धचालकों को इन्ट्रिंजिक अर्द्धचालक कहते हैं। परम शून्य ताप पर अर्द्धचालक कुचालक की भाँति व्यवहार करता हैं। आन्तरिक अर्द्धचालक में इलेक्ट्रॉन तथा होल दोनों होते हैं। ताप बढ़ाने पर अर्द्धचालक की प्रतिरोधकता घटती है, अत: इसका प्रतिरोध ताप गुणांक ऋणात्मक होता हैं।