Correct Answer:
Option A - प्राथमिक कक्षा के अधिगमकर्ताओं में ‘‘बीजीय-चिंतन’’ को विकसित करने के लिए शिक्षक आकृतियों की पुनरावृत्ति वाले सरल प्रतिमानों से आरम्भ करे एवं फिर ऐसे जटिल प्रतिमानों की ओर बढ़े जिनमें संख्याएँ भी शामिल हों। बीजीय-चिंतन में प्रतिमानों को पहचानना और उनका विश्लेषण करना, संबंधों का अध्ययन करना और यह विश्लेषण करना शामिल है कि चीजें कैंसे बदलती हैं। इस प्रकार के चिंतन का उपयोग करने की सुविधा समस्याओं को हल करने के लिए बीजगणित को लागू करने में कुशल बनने का एक अभिन्न अंग है।
A. प्राथमिक कक्षा के अधिगमकर्ताओं में ‘‘बीजीय-चिंतन’’ को विकसित करने के लिए शिक्षक आकृतियों की पुनरावृत्ति वाले सरल प्रतिमानों से आरम्भ करे एवं फिर ऐसे जटिल प्रतिमानों की ओर बढ़े जिनमें संख्याएँ भी शामिल हों। बीजीय-चिंतन में प्रतिमानों को पहचानना और उनका विश्लेषण करना, संबंधों का अध्ययन करना और यह विश्लेषण करना शामिल है कि चीजें कैंसे बदलती हैं। इस प्रकार के चिंतन का उपयोग करने की सुविधा समस्याओं को हल करने के लिए बीजगणित को लागू करने में कुशल बनने का एक अभिन्न अंग है।