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Q: `प्राप्ते मित्रे भवति विमुख किं पुनर्यस्तथोच्चै' यह श्लोकांश उदधृत है :
  • A. मेघदूत से
  • B. अभिज्ञानशाकुलतम् से
  • C. किरातार्जुनीयम् से
  • D. शिवराजविजयम् से
Correct Answer: Option B - प्रस्तुत श्लोकांश कालिदास विरचित मेघदूतम् (पूर्व) से अवतरित है जिसका आशय है कि तुच्छ व्यक्ति भी मित्र के आगमन पर, पहले किए गए उपकार को ध्यान करके प्रतिकूल व्यवहार नहीं करता तो फिर जो स्वभाव से ही इतना ऊँचा है उसका कहना ही क्या?
B. प्रस्तुत श्लोकांश कालिदास विरचित मेघदूतम् (पूर्व) से अवतरित है जिसका आशय है कि तुच्छ व्यक्ति भी मित्र के आगमन पर, पहले किए गए उपकार को ध्यान करके प्रतिकूल व्यवहार नहीं करता तो फिर जो स्वभाव से ही इतना ऊँचा है उसका कहना ही क्या?

Explanations:

प्रस्तुत श्लोकांश कालिदास विरचित मेघदूतम् (पूर्व) से अवतरित है जिसका आशय है कि तुच्छ व्यक्ति भी मित्र के आगमन पर, पहले किए गए उपकार को ध्यान करके प्रतिकूल व्यवहार नहीं करता तो फिर जो स्वभाव से ही इतना ऊँचा है उसका कहना ही क्या?