Correct Answer:
Option A - पुलकेशिन द्वितीय वातापी के चालुक्य वंश का प्रतापी शासक था। यह कीर्ति वर्मन प्रथम का पुत्र था। पुलकेशिन-II के युद्ध एव विजयों के विषयों में जानकारी ऐहोल अभिलेख से मिलती है। इसकी रचना उसके समकालीन कवि रविकीर्ति ने की थी। पुलकेशिन द्वितीय ने हर्षवर्धन को नर्मदा नदी के तट पर हराकर सम्पूर्ण दक्षिण भारत को अपने नियंत्रण में कर लिया। हर्षवर्धन को पराजित करने के पश्चात पुलकेशिन द्वितीय ने अपना दूसरा नाम परमेश्वर रखा। लोहनेर अभिलेख में पुलकेशिन द्वितीय को ‘पूरब एवं पश्चिमी पयोधि का स्वामी’ कहा गया है। इसी अभिलेख में इसे परमभागवत् कहा गया है।
A. पुलकेशिन द्वितीय वातापी के चालुक्य वंश का प्रतापी शासक था। यह कीर्ति वर्मन प्रथम का पुत्र था। पुलकेशिन-II के युद्ध एव विजयों के विषयों में जानकारी ऐहोल अभिलेख से मिलती है। इसकी रचना उसके समकालीन कवि रविकीर्ति ने की थी। पुलकेशिन द्वितीय ने हर्षवर्धन को नर्मदा नदी के तट पर हराकर सम्पूर्ण दक्षिण भारत को अपने नियंत्रण में कर लिया। हर्षवर्धन को पराजित करने के पश्चात पुलकेशिन द्वितीय ने अपना दूसरा नाम परमेश्वर रखा। लोहनेर अभिलेख में पुलकेशिन द्वितीय को ‘पूरब एवं पश्चिमी पयोधि का स्वामी’ कहा गया है। इसी अभिलेख में इसे परमभागवत् कहा गया है।