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Q: पोल के आधार पर वाहनों में प्रयुक्त वायरिंग है-
  • A. सिंगल पोल
  • B. डबल पोल
  • C. a और b दोनों
  • D. इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: Option C - पोल के आधार पर वाहनों में मुख्यत: दो प्रकार की वायरिंग प्रयुक्त होते हैं। (1) सिंगल पोल (2) डबल पोल सिंगल पोल वायरिंग– इन वायरिंग में बैट्री का निगेटिव चेसिस के साथ मोटी तार द्वारा अर्थ किया जाता है। जिस बिजली यूनिट को चलना हो, उसका निगेटिव टर्मिनल बॉडी के साथ जोड़ा जाता है और केवल पॉजिटिव तार की उस यूनिट तक ले जायी जाती है जिससे एक तार की लंबाई हर एक सर्किट में बच जाती है तथा खर्चा कम होता है। डबल पोल वायरिंग– बैट्री से दो तारें (–Ve और + Ve ) पर एक यूनिट जिसको भी चलाना हो ली जाती है।
C. पोल के आधार पर वाहनों में मुख्यत: दो प्रकार की वायरिंग प्रयुक्त होते हैं। (1) सिंगल पोल (2) डबल पोल सिंगल पोल वायरिंग– इन वायरिंग में बैट्री का निगेटिव चेसिस के साथ मोटी तार द्वारा अर्थ किया जाता है। जिस बिजली यूनिट को चलना हो, उसका निगेटिव टर्मिनल बॉडी के साथ जोड़ा जाता है और केवल पॉजिटिव तार की उस यूनिट तक ले जायी जाती है जिससे एक तार की लंबाई हर एक सर्किट में बच जाती है तथा खर्चा कम होता है। डबल पोल वायरिंग– बैट्री से दो तारें (–Ve और + Ve ) पर एक यूनिट जिसको भी चलाना हो ली जाती है।

Explanations:

पोल के आधार पर वाहनों में मुख्यत: दो प्रकार की वायरिंग प्रयुक्त होते हैं। (1) सिंगल पोल (2) डबल पोल सिंगल पोल वायरिंग– इन वायरिंग में बैट्री का निगेटिव चेसिस के साथ मोटी तार द्वारा अर्थ किया जाता है। जिस बिजली यूनिट को चलना हो, उसका निगेटिव टर्मिनल बॉडी के साथ जोड़ा जाता है और केवल पॉजिटिव तार की उस यूनिट तक ले जायी जाती है जिससे एक तार की लंबाई हर एक सर्किट में बच जाती है तथा खर्चा कम होता है। डबल पोल वायरिंग– बैट्री से दो तारें (–Ve और + Ve ) पर एक यूनिट जिसको भी चलाना हो ली जाती है।