Correct Answer:
Option A - ऋग्वेद में बढ़ई, रथकार, बुनकर, चर्मकार, कुम्हार आदि शिल्पियों के उल्लेख मिलते हैं। ताँबे या काँसे के अर्थ में अयस शब्द का प्रयोग होता था जिससे ज्ञात होता है कि आर्यों को धातुकर्म की जानकारी थी। ऋग्वेद में बढ़ई के लिए तक्षण तथा धातुकर्मी के लिए कमरि शब्द मिलता है। सोला के लिए हिरण्य शब्द का प्रयोग हुआ है। बसावाय नामक वर्ग कपड़ा बुनने का कार्य करता था। कपड़े की बुनाई करघो से की जाती थी। करघी (चरखी) को तसर तना को ओतु तथा बाना को तन्तु कहा जाता था।
A. ऋग्वेद में बढ़ई, रथकार, बुनकर, चर्मकार, कुम्हार आदि शिल्पियों के उल्लेख मिलते हैं। ताँबे या काँसे के अर्थ में अयस शब्द का प्रयोग होता था जिससे ज्ञात होता है कि आर्यों को धातुकर्म की जानकारी थी। ऋग्वेद में बढ़ई के लिए तक्षण तथा धातुकर्मी के लिए कमरि शब्द मिलता है। सोला के लिए हिरण्य शब्द का प्रयोग हुआ है। बसावाय नामक वर्ग कपड़ा बुनने का कार्य करता था। कपड़े की बुनाई करघो से की जाती थी। करघी (चरखी) को तसर तना को ओतु तथा बाना को तन्तु कहा जाता था।