Correct Answer:
Option C - धरातल पर प्रवाहित हवाओं की दिशा तथा वायुदाब पृथ्वी की घूर्णन गति द्वारा निर्धारित होती है। यदि पृथ्वी में अक्षीय गति नहीं होती, तो हवाएँ समदाब रेखाओं के समकोण की दिशा में प्रवाहित होतीं, परन्तु पृथ्वी में अक्षीय गति के कारण हवाओं की दिशा में विक्षेप हो जाता है, जिसे विक्षेप बल या कोरियालिसिस बल कहते हैं। यह भूमध्य रेखा पर न्यूनतम एवं ध्रुवों पर अधिकतम होता है। कोरियालिस बल प्रत्यक्ष रूप से घर्षण बल से सम्बन्धित है। यह वायु की गति के समानुपाती है। यह पृथ्वी के घूर्णन या अवर्तन का प्रभाव है, पर यह एक काल्पनिक बल नहीं है। अत: कथन (A) असत्य है।
नोट :- आयोग ने इसका विकल्प (C) सही माना है।
C. धरातल पर प्रवाहित हवाओं की दिशा तथा वायुदाब पृथ्वी की घूर्णन गति द्वारा निर्धारित होती है। यदि पृथ्वी में अक्षीय गति नहीं होती, तो हवाएँ समदाब रेखाओं के समकोण की दिशा में प्रवाहित होतीं, परन्तु पृथ्वी में अक्षीय गति के कारण हवाओं की दिशा में विक्षेप हो जाता है, जिसे विक्षेप बल या कोरियालिसिस बल कहते हैं। यह भूमध्य रेखा पर न्यूनतम एवं ध्रुवों पर अधिकतम होता है। कोरियालिस बल प्रत्यक्ष रूप से घर्षण बल से सम्बन्धित है। यह वायु की गति के समानुपाती है। यह पृथ्वी के घूर्णन या अवर्तन का प्रभाव है, पर यह एक काल्पनिक बल नहीं है। अत: कथन (A) असत्य है।
नोट :- आयोग ने इसका विकल्प (C) सही माना है।