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Comprehension : एक गद्यांश दिया गया है। गद्यांश के आधा पर पाँच प्रश्न दिए गए हैं। गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनें। मानक भाषा, वह भाषा होती है, जिसका मानकीकरण किया गया हो। हिन्दी की अनेक बोलियाँ व उपबोलियाँ हैं, जिनमें खड़ी बोली को मानक हिन्दी नाम दिया गया है। इसी खड़ी बोली से हिन्दी में शिक्षा का प्रचार-प्रसार होता है। इस खड़ी बोली के अन्तर्गत अन्य क्षेत्रीय बोलियाँ समाविष्ट नहीं है। सम्पूर्ण देश में भाषा में एकरूपता व उसे अनुशासित रखने के लिए मानक भाषा की आवश्यकता पड़ती है। मानक का अर्थ होता है– परिनिष्ठित, आदर्श या श्रेष्ठ। भाषा के जिस रूप का व्यवहार शिक्षा, प्रशासनिक कार्यों, सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से उसमें उपस्थित विविध विषमताओं को दूर करके उसमें साम्यता लाकर एकरूप में किया जाता है, वही भाषा का मानक रूप होता है। किसी क्षेत्र की स्थानीय या आँचलिक बोली का शब्द-भण्डार सीमित होता है तथा उसका कोई नियमित व्याकरण भी नहीं होता , जिसके कारण इसे अधिकारिक या व्यावहारिक भाषा का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। इसलिए ऐसी बोली विशिष्ट भौगोलिक, राजनीतिक, प्रशासनिक, सांस्कृतिक, सामाजिक आदि कारणों से अपना एक व्याकरणिक रूप विकसित कर लेती है, जोकि पत्राचार, शिक्षा, व्यापार, प्रशासन आदि में लिखित रूप में प्रयोग होने लगता है। इस प्रकार वह बोली एक मानक भाषा बन जाती है। भाषा प्रयोग की दृष्टि से यह बोली व्यापक हो जाती है और एक आदर्श, परिनिष्ठितता को प्राप्त कर लेती है। इसकी एक मानक शब्दावली का जन्म हो जाता है, जिससे यह मानक भाषा शुद्ध व परिमार्जित हो जाती है। भाषा का मानकीकरण एक बहुत की महत्वपूर्ण और अत्यावश्यक प्रक्रिया है। उदाहरण के लिए, क्षेत्रीय भाषा के स्तर पर ‘चाबी’ को अनेक नामों से पुकारा जाता है; जैसे-कुंजी , खोलनी, चाभी आदि, लेकिन यह आवश्यक नहीं कि पूरे हिन्दी प्रदेश में ‘चाबी’ को खोलनी या कुंजी कहा जाए और सभी को समझ आ जाए। इसलिए इस शब्द के यदि एक मानक रूप ‘चाबी’ को स्वीकृत किया जाए तो पूरा हिन्दी प्रदेश इसके प्रयोग को समझ जाएगा। इस प्रकार स्पष्ट है कि भाषा का मानकीकरण एक अनिवार्य प्रक्रिया होती है। एक आदर्श या मानक भाषा अपने आप में जीवन्त, स्वायत्त और ऐतिहासिक होती है। समाविष्ट शब्द का विलोम बताए।