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Q: ‘जहँ राधा आनन उदित, निसि बासर आनंद। तहाँ कहा अरविन्द है, कहा बापुरो चन्द।।’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
  • A. रूपक
  • B. प्रतीप
  • C. अनन्वय
  • D. दीपक
Correct Answer: Option B - जहँ राधा आनन उदित, निसि बासर आनंद। तहाँ कहा अरविन्द है, कहा बापुरो चन्द।। प्रस्तुत पंक्ति में प्रतीप अलंकार है। प्रतीप अलंकार- जहाँ उपमेय को उपमान और उपमान को उपमेय बताया जाता है, वहाँ प्रतीप अलंकार होता है। यह उपमा का उल्टा होता है। रूपक अलंकार - जहाँ उपमेय और उपमान में पूर्ण समानता बताई जाए, वहाँ रूपक अलंकार होता है। जैसे- राम - नाम मनि - दीप धरू, जीह देहरी द्वार। तुलसी भीतर बाहिरौ, जो चाहत उजियार।। अनन्वय अलंकार - जहाँ उपमेय की तुलना करने के लिए कोई उपमान न हो और उपमेय को ही उपमान बना दिया जाता है, तब वहाँ ‘अनन्वय अलंकार’ होता है। जैसे- ‘‘मुख ही मुख के समान सुंदर है।’’ दीपक अलंकार - जब किसी पद में उपमेय (प्रस्तुत पदार्थ) तथा उपमान (अप्रस्तुत पदार्थ) दोनों के लिए एक ही साधारण धर्म होता है तो, वहाँ दीपक अलंकार होता है। जैसे- ‘‘भूपति सोहत दान सों, फल फूलन उद्यान।’’
B. जहँ राधा आनन उदित, निसि बासर आनंद। तहाँ कहा अरविन्द है, कहा बापुरो चन्द।। प्रस्तुत पंक्ति में प्रतीप अलंकार है। प्रतीप अलंकार- जहाँ उपमेय को उपमान और उपमान को उपमेय बताया जाता है, वहाँ प्रतीप अलंकार होता है। यह उपमा का उल्टा होता है। रूपक अलंकार - जहाँ उपमेय और उपमान में पूर्ण समानता बताई जाए, वहाँ रूपक अलंकार होता है। जैसे- राम - नाम मनि - दीप धरू, जीह देहरी द्वार। तुलसी भीतर बाहिरौ, जो चाहत उजियार।। अनन्वय अलंकार - जहाँ उपमेय की तुलना करने के लिए कोई उपमान न हो और उपमेय को ही उपमान बना दिया जाता है, तब वहाँ ‘अनन्वय अलंकार’ होता है। जैसे- ‘‘मुख ही मुख के समान सुंदर है।’’ दीपक अलंकार - जब किसी पद में उपमेय (प्रस्तुत पदार्थ) तथा उपमान (अप्रस्तुत पदार्थ) दोनों के लिए एक ही साधारण धर्म होता है तो, वहाँ दीपक अलंकार होता है। जैसे- ‘‘भूपति सोहत दान सों, फल फूलन उद्यान।’’

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जहँ राधा आनन उदित, निसि बासर आनंद। तहाँ कहा अरविन्द है, कहा बापुरो चन्द।। प्रस्तुत पंक्ति में प्रतीप अलंकार है। प्रतीप अलंकार- जहाँ उपमेय को उपमान और उपमान को उपमेय बताया जाता है, वहाँ प्रतीप अलंकार होता है। यह उपमा का उल्टा होता है। रूपक अलंकार - जहाँ उपमेय और उपमान में पूर्ण समानता बताई जाए, वहाँ रूपक अलंकार होता है। जैसे- राम - नाम मनि - दीप धरू, जीह देहरी द्वार। तुलसी भीतर बाहिरौ, जो चाहत उजियार।। अनन्वय अलंकार - जहाँ उपमेय की तुलना करने के लिए कोई उपमान न हो और उपमेय को ही उपमान बना दिया जाता है, तब वहाँ ‘अनन्वय अलंकार’ होता है। जैसे- ‘‘मुख ही मुख के समान सुंदर है।’’ दीपक अलंकार - जब किसी पद में उपमेय (प्रस्तुत पदार्थ) तथा उपमान (अप्रस्तुत पदार्थ) दोनों के लिए एक ही साधारण धर्म होता है तो, वहाँ दीपक अलंकार होता है। जैसे- ‘‘भूपति सोहत दान सों, फल फूलन उद्यान।’’