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Q: नवगीत विधा से संबंधित काव्यकृति ‘दर्द जहां नीला है’ के रचनाकार हैं–
  • A. वीरेन्द्र मिश्र
  • B. कुँवर बेचैन
  • C. रवीन्द्र भ्रमर
  • D. शंभुनाथ सिंह
Correct Answer: Option D - नवगीत विधा से संबंधित काव्यकृति ‘दर्द जहाँ नीला है’ के रचनाकार – शंभुनाथ सिंह हैं। डॉ. शम्भुनाथ सिंह के अन्य नवगीत-संकलन– रूप रश्मि, छायालोक, मन्वन्तर, उदयाचल (1946), दिवालोक (1951), समय की शिला पर (1968)। – हिन्दी में ‘नवगीत’ परम्परा का आरम्भ राजेन्द्र प्रसाद सिंह द्वारा सन् 1958 में सम्पादित ‘गीतांगिनी’ शीर्षक नवगीत संकलन से माना जाता है। वीरेन्द्र मिश्र के नवगीत संकलन– गीतम, लेखनी-बेला, अविराम चल मधुवन्ति। कुँवर बेचैन के नवगीत संकलन– पिन बहुत सारे (1972), शामियाने काँच के (1983), महावर इन्तजारों का (1983)। रवीन्द्र भ्रमर के नवगीत संकलन– रवीन्द्र भ्रमर के गीत (1963), सोन मछरी मन बसी।
D. नवगीत विधा से संबंधित काव्यकृति ‘दर्द जहाँ नीला है’ के रचनाकार – शंभुनाथ सिंह हैं। डॉ. शम्भुनाथ सिंह के अन्य नवगीत-संकलन– रूप रश्मि, छायालोक, मन्वन्तर, उदयाचल (1946), दिवालोक (1951), समय की शिला पर (1968)। – हिन्दी में ‘नवगीत’ परम्परा का आरम्भ राजेन्द्र प्रसाद सिंह द्वारा सन् 1958 में सम्पादित ‘गीतांगिनी’ शीर्षक नवगीत संकलन से माना जाता है। वीरेन्द्र मिश्र के नवगीत संकलन– गीतम, लेखनी-बेला, अविराम चल मधुवन्ति। कुँवर बेचैन के नवगीत संकलन– पिन बहुत सारे (1972), शामियाने काँच के (1983), महावर इन्तजारों का (1983)। रवीन्द्र भ्रमर के नवगीत संकलन– रवीन्द्र भ्रमर के गीत (1963), सोन मछरी मन बसी।

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नवगीत विधा से संबंधित काव्यकृति ‘दर्द जहाँ नीला है’ के रचनाकार – शंभुनाथ सिंह हैं। डॉ. शम्भुनाथ सिंह के अन्य नवगीत-संकलन– रूप रश्मि, छायालोक, मन्वन्तर, उदयाचल (1946), दिवालोक (1951), समय की शिला पर (1968)। – हिन्दी में ‘नवगीत’ परम्परा का आरम्भ राजेन्द्र प्रसाद सिंह द्वारा सन् 1958 में सम्पादित ‘गीतांगिनी’ शीर्षक नवगीत संकलन से माना जाता है। वीरेन्द्र मिश्र के नवगीत संकलन– गीतम, लेखनी-बेला, अविराम चल मधुवन्ति। कुँवर बेचैन के नवगीत संकलन– पिन बहुत सारे (1972), शामियाने काँच के (1983), महावर इन्तजारों का (1983)। रवीन्द्र भ्रमर के नवगीत संकलन– रवीन्द्र भ्रमर के गीत (1963), सोन मछरी मन बसी।