Correct Answer:
Option D - नीतिशतकम् के अनुसार पूर्वकृत तप या कर्मों के द्वारा वयक्ति अपने भाग्य (भाग्यानि) का निर्माण करता है अर्थात् मनुष्य के भाग्य पूर्वकृत तप द्वारा बनते हैं। यहाँ तप का अर्थ है कर्म, अर्थात् पूर्वकृत कर्म ही भाग्य का निर्माण करती है।
D. नीतिशतकम् के अनुसार पूर्वकृत तप या कर्मों के द्वारा वयक्ति अपने भाग्य (भाग्यानि) का निर्माण करता है अर्थात् मनुष्य के भाग्य पूर्वकृत तप द्वारा बनते हैं। यहाँ तप का अर्थ है कर्म, अर्थात् पूर्वकृत कर्म ही भाग्य का निर्माण करती है।