Correct Answer:
Option C - ‘नैषधीयचरित्’ श्री हर्ष की रचना है। यह वृहत्त्रयी का काव्य है। महाभारत के नलोपाख्यान से इसकी कथावस्तु ली गई है। यह विशाल महाकाव्य 22 सर्गों में विभक्त है। शेष विवरण इस प्रकार है-
भास– स्वप्नवासवदत्ता, प्रतिज्ञा यौगंधरायण, दरिद्र चारुदत्त, अविमारक, प्रतिभा, अभिषेक, बाल चरित, पंचरात्र, मध्यमाव्यायोग दूतवाक्य, दूतघटोत्कच, कर्णभार, उरुभंग।
कालिदास– अभिज्ञानशाकुन्तलम, विक्रमोर्वशीयम्, मालविकाग्निमित्रम्, रघुवंशम्, कुमारसंभवम्, मेघदूतम्, ऋतुसंहार।
भारवि– किरातार्जुनीयम्।
C. ‘नैषधीयचरित्’ श्री हर्ष की रचना है। यह वृहत्त्रयी का काव्य है। महाभारत के नलोपाख्यान से इसकी कथावस्तु ली गई है। यह विशाल महाकाव्य 22 सर्गों में विभक्त है। शेष विवरण इस प्रकार है-
भास– स्वप्नवासवदत्ता, प्रतिज्ञा यौगंधरायण, दरिद्र चारुदत्त, अविमारक, प्रतिभा, अभिषेक, बाल चरित, पंचरात्र, मध्यमाव्यायोग दूतवाक्य, दूतघटोत्कच, कर्णभार, उरुभंग।
कालिदास– अभिज्ञानशाकुन्तलम, विक्रमोर्वशीयम्, मालविकाग्निमित्रम्, रघुवंशम्, कुमारसंभवम्, मेघदूतम्, ऋतुसंहार।
भारवि– किरातार्जुनीयम्।