Correct Answer:
Option C - यह पंक्ति नीतिशतक से ली गयी है जिसमें उद्यम के विषय में स्पष्ट किया गया है - नास्त्युद्यमसमो बन्धु: कुर्वाणो नावसीदति–अर्थात् उद्यम (परिश्रम) के समान कोई मित्र नहीं, जिसे करने में मनुष्य दुखी नहीं होता।
C. यह पंक्ति नीतिशतक से ली गयी है जिसमें उद्यम के विषय में स्पष्ट किया गया है - नास्त्युद्यमसमो बन्धु: कुर्वाणो नावसीदति–अर्थात् उद्यम (परिश्रम) के समान कोई मित्र नहीं, जिसे करने में मनुष्य दुखी नहीं होता।