Correct Answer:
Option B - इन्द्रस्य प्रार्थनां श्रुत्वा दधीचि: प्रतिक्रियाम् प्रादर्शयत् ‘स: पूर्णतया प्रसन्न: अभवत्’। इन्द्र की प्रार्थना को सुनकर महर्षि दधीचि ने पूर्ण प्रसन्न होकर प्रतिक्रिया प्रदर्शित की।
श्रुत्वा– श्रु + क्त्वा - वाक्य में मुख्य क्रिया से पूर्व किए गए कार्य में पूर्वकालिक क्रिया को व्यक्त करने के लिए धातु में क्त्वा प्रत्यय का योग किया जाता है। क्त्वा प्रत्ययान्त शब्द अव्यय होते हैं। इनके रूप में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
उदाहरण- कृ + क्त्वा = कृत्वा, पा + क्त्वा = पीत्वा, प्रच्छ् + क्त्वा = पृष्ट्वा इत्यादि।
B. इन्द्रस्य प्रार्थनां श्रुत्वा दधीचि: प्रतिक्रियाम् प्रादर्शयत् ‘स: पूर्णतया प्रसन्न: अभवत्’। इन्द्र की प्रार्थना को सुनकर महर्षि दधीचि ने पूर्ण प्रसन्न होकर प्रतिक्रिया प्रदर्शित की।
श्रुत्वा– श्रु + क्त्वा - वाक्य में मुख्य क्रिया से पूर्व किए गए कार्य में पूर्वकालिक क्रिया को व्यक्त करने के लिए धातु में क्त्वा प्रत्यय का योग किया जाता है। क्त्वा प्रत्ययान्त शब्द अव्यय होते हैं। इनके रूप में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
उदाहरण- कृ + क्त्वा = कृत्वा, पा + क्त्वा = पीत्वा, प्रच्छ् + क्त्वा = पृष्ट्वा इत्यादि।