Q: निर्देश- प्रश्न संख्या (208 से 214) अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा सप्तप्रश्नानां (9-15) समीचीनानि उत्तराणि देयानि- एकस्मिं ग्रामे एक निर्धन: कृषक: वसति स्म। स स्वल्पभूखण्डस्य स्वाम्यासीत् । परन्तु तस्य प्रतिवेशी विस्तृतभूखण्डस्य स्वाम्यासीत् । अस्मात् कारणादेव प्रतिवेशी धनवान् आसीत् । स: स्वयं कृषिकार्यं नाकरोत्। तस्य क्षेत्रे श्रमिका: कार्य कुर्वन्ति स्म। प्रतिवेशिमनसि धनाढ्यताया: अहंकार: संजात:। स: प्रायश: निर्धन-कृषकस्यापमानं करोति स्म। अनेन प्रतिवेशिन: व्यवहारेण निर्धन: कृषक: दु:ख्यभवत् । एकदा खिन्नमनसा स्वक्षेत्रेष्वभ्रमत्। तेन एक: जन: स्वक्षेत्रे मूर्छितवस्थायां दृष्ट:। कृषकेण मूर्छितजनस्य जलबिन्दुभि: सेचनं कृतं। कृषकस्य तत्प्रयासेन मूर्छितजन: संज्ञा लब्धवान् ।कृषक: कस्य व्यवहारेण दु:खी अभवत् ।
A.
श्रमिकस्य
B.
प्रतिवेशिन:
C.
आगन्तुकजनस्य
D.
मूर्छितस्य
Correct Answer:
Option B - कृषक: ‘प्रतिवेशिन:’ व्यवहारेण दु:खी अभवत्।
अर्थात्- निर्धन कृषक प्रतिवेशी के व्यवहार से दु:खी हुआ। वह धनाढ्य होने के साथ अलंकारी स्वभाव का था। वह प्राय: निर्धन कृषक का अपमान किया करता था।
B. कृषक: ‘प्रतिवेशिन:’ व्यवहारेण दु:खी अभवत्।
अर्थात्- निर्धन कृषक प्रतिवेशी के व्यवहार से दु:खी हुआ। वह धनाढ्य होने के साथ अलंकारी स्वभाव का था। वह प्राय: निर्धन कृषक का अपमान किया करता था।
Explanations:
कृषक: ‘प्रतिवेशिन:’ व्यवहारेण दु:खी अभवत्।
अर्थात्- निर्धन कृषक प्रतिवेशी के व्यवहार से दु:खी हुआ। वह धनाढ्य होने के साथ अलंकारी स्वभाव का था। वह प्राय: निर्धन कृषक का अपमान किया करता था।
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