Correct Answer:
Option B - ‘स्वीकृत्य’ इति पदे कृदन्तप्रत्ययं ‘ल्यप्’। अर्थात्-स्वीकृत्य में ल्यप् प्रत्यय प्रयुक्त है। समासेऽनञ्पूर्वे क्त्वो ल्यप् - धातु से पूर्व कोई अव्यय, उपसर्ग या च्वि प्रत्यय हो तो क्त्वा के स्थान पर ल्यप् हो जाता है। ल्यप् प्रत्यय का ‘य’ शेष बचता है। धातु से पहले नञ् (अ) होगा तो ल्यप् प्रत्यय नहीं होगा। यथा-प्रचल्य, संचित्य।
क्त्वा प्रत्यय कर या करके अर्थ में प्रयुक्त होता है। क्त्वा का त्वा शेष बचता है। धातु से पहले उपसर्ग न हो तो क्त्वा प्रत्यय का प्रयोग होता है। यथा- हित्वा, गीत्वा, जित्वा।
शतृप्रत्यय का प्रयोग परस्मैपदी धातुओं के लट् के स्थान पर होता है। शतृ का ‘अत्’ शेष बचता है। यथा-गच्छन् , खनन्, धावन्
शानच् प्रत्यय– आत्मनेपदी धातुओं के लट् के स्थान पर शानच् प्रत्यय यथा- अधीयान:, आसीन:, कुर्दमान:।
B. ‘स्वीकृत्य’ इति पदे कृदन्तप्रत्ययं ‘ल्यप्’। अर्थात्-स्वीकृत्य में ल्यप् प्रत्यय प्रयुक्त है। समासेऽनञ्पूर्वे क्त्वो ल्यप् - धातु से पूर्व कोई अव्यय, उपसर्ग या च्वि प्रत्यय हो तो क्त्वा के स्थान पर ल्यप् हो जाता है। ल्यप् प्रत्यय का ‘य’ शेष बचता है। धातु से पहले नञ् (अ) होगा तो ल्यप् प्रत्यय नहीं होगा। यथा-प्रचल्य, संचित्य।
क्त्वा प्रत्यय कर या करके अर्थ में प्रयुक्त होता है। क्त्वा का त्वा शेष बचता है। धातु से पहले उपसर्ग न हो तो क्त्वा प्रत्यय का प्रयोग होता है। यथा- हित्वा, गीत्वा, जित्वा।
शतृप्रत्यय का प्रयोग परस्मैपदी धातुओं के लट् के स्थान पर होता है। शतृ का ‘अत्’ शेष बचता है। यथा-गच्छन् , खनन्, धावन्
शानच् प्रत्यय– आत्मनेपदी धातुओं के लट् के स्थान पर शानच् प्रत्यय यथा- अधीयान:, आसीन:, कुर्दमान:।